स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के लिए बैटरी हमेशा से सबसे बड़ी चिंता रही है। रोजाना फोन चार्ज करना एक आदत बन गई है। लेकिन अब ये स्थिति बदल रही है। कंपनियां एक नई बैटरी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं, जो फोन का साइज बढ़ाए बिना ज्यादा बैटरी देने का वादा करती है। इस टेक्नोलॉजी को सिलिकॉन-कार्बन बैटरी कहा जाता है। ये नए स्मार्टफोन में दी रही है। हाल ही में, OnePlus Nord 6 में 9,000mAh की बैटरी दी गई है। Samsung ने भी इस बात को कंफर्म किया है कि वह अपने अपकमिंग स्मार्टफोन में सिलिकॉन बैटरी लाने की तैयारी कर रहा है।
ये बैटरी बाकियों से अलग कैसे है?
लिथियम-आयन बैटरी में ग्रेफाइट का इस्तेमाल होता है, जहां लिथियम आयन घूमते हैं और बिजली बनती है। सिलिकॉन-कार्बन बैटरी में, ग्रेफाइट की जगह सिलिकॉन का इस्तेमाल होता है। सिलिकॉन, ग्रेफाइट के मुकाबले कई गुना ज्यादा लिथियम आयन स्टोर कर सकता है। आसान शब्दों में कहें तो, जैसे एक कमरे में ज्यादा लोग आ सकते हैं, वैसे ही इस बैटरी में ज्यादा एनर्जी स्टोर की जा सकती है।
यूजर्स को ये तीन फायदे मिलते हैं…
इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फोन का साइज बढ़ाए बिना बैटरी की कैपेसिटी बढ़ाई जा सकती है। यानी, जहां पहले 5,000mAh की बैटरी मिलती थी, वहीं अब उसी साइज में 6,500mAh या उससे ज्यादा की बैटरी दी जा रही है।
नई टेक्नोलॉजी के साथ, कंपनियों के पास कई ऑप्शन होते हैं। वे दो तरीके अपना सकती हैं: या तो फोन का बैकअप बढ़ाने के लिए ज्यादा बैटरी दें, या फिर बैटरी का साइज वही रखें और फोन को ज्यादा पतला और हल्का बनाएं।
ये बैटरीज अलग-अलग मौसम की स्थितियों में भी बेहतर काम करती हैं। बहुत ज्यादा ठंड या गर्मी में भी इनका परफॉर्मेंस स्टेबल रहता है। फोन के गर्म होने का चार्जिंग की स्पीड पर कम असर पड़ता है।
बड़ी बैटरी वाले लेटेस्ट फोन्स:
OnePlus 15: 7,300mAh
OnePlus Nord 6: 9,000mAh
Realme P4 Power: 10,001mAh
Xiaomi 17 Pro Max: 7,500mAh
Oppo Find X9 Pro: 7,500mAh
Apple-Google में ये कब आएगी?
2026 की शुरुआत तक, Apple और Google ने अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन में सिलिकॉन-कार्बन (Si-C) बैटरी टेक्नोलॉजी को नहीं अपनाया है। हालांकि, Apple और Google दोनों ही कथित तौर पर सिलिकॉन-एनोड टेक्नोलॉजी पर एक्टिवली रिसर्च और टेस्टिंग कर रहे हैं। इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि खासतौर पर Apple, 2026–2027 की टाइम-लिमिट में इस टेक्नोलॉजी की ओर एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, Samsung ने कार्बन-सिलिकॉन बैटरी का टेस्ट भी किया है।
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