एक और जहां आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के शताब्दी वर्ष पर आधारित एआई फिल्म ‘शतक’ के पार्ट टू बनने की संभावनाएं तेज हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर एआई निर्मित फिल्म ‘कलियुग राइजिंग’ ने वैश्विक स्तर पर नौ हजार फिल्मों के बीच अपना नाम दर्ज करके इतिहास रच दिया है।
‘कलियुग राइजिंग’ की सफलता इस बात का संकेत है कि निर्देशक भारतीय रचनात्मकता अब एआइ तकनीक के साथ वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रही है। फिल्म निर्माता प्रतया साहा ने जागरण से बातचीत में बताया कि यह केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि तकनीकी अनुभव भी है।
उन्होंने कहा कि एआई से डरने का नहीं बल्कि उसकी मदद से कुछ असाधारण करने का वक्त आ गया है। इस फिल्म ने साबित कर दिया है कि इंडस्ट्री में एआई निर्मित फिल्में बनाना मुश्किल नहीं है, केवल इसके टूल्स को सही ढंग से प्रयोग में लाने की आवश्यकता है। जल्द ही इस फिल्म का पार्ट टू भी रिलीज होने वाला है।
वैश्विक मंच पर पहचान बना रहीं एआई फिल्में
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य के बाद अब भारतीय फिल्म उद्योग भी शामिल हो गया है। हाल ही में एआई निर्मित भारतीय फिल्म ‘कलियुग राइजिंग’ ने हिक्सफील्ड मेक योर एक्शन प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल करके यह साबित कर दिया कि विश्व में भारतीय एआई फिल्मों का सितारा चमकने लगा है।
86 घंटे में बनी यह फिल्म
इस फिल्म में एआई की मदद से एक साउथ एशियाई बॉक्सिंग रिंग तैयार किया गया है, जहां हीरो अपनी पत्नी की जिंदगी बचाने के लिए लड़ने जाता है। इसके साथ ही फिल्म में चरित्र भी एआई की मदद से ही बनाए गए हैं। साहा ने कहा कि यह फिल्म बनाने में पारंपरिक प्रक्रियाओं का ही इस्तेमाल हुआ है, केवल प्रोडक्शन और पोस्ट प्रोडक्शन में एआई का प्रयोग किया गया है। इससे फिल्म की लागत और समय दोनों में ही बचत हुई है। सबसे खास बात यह है कि यह फिल्म बनाने में केवल 86 घंटे ही लगे हैं।
क्या है एआई निर्मित फिल्मों की विशेषता
बड़े बजट की फिल्मों की लागत कम होगी।
फिल्में बनाने में समय कम लगेगा।
भविष्य में एआई तकनीक और कला का होगा संगम।
वास्तविक अनुभव के करीब होंगी फिल्में
निर्माणाधीन फिल्में
नायशा: (बॉलीवुड सुपरस्टार और रैपर की कहानी)
चिरंजीवी हनुमान: (एआई आधारित पौराणिक प्रस्तुति)
शिवसती: (कलाकारों और एआई के सहयोग से बनेगी)
उल्लूमैन: (सुपरहीरो माइक्रोड्रामा का फिल्म रूपांतरण)
महाराज इन डेनिम
कैसे बनी यह फिल्म?
यह फिल्म इमैजिन इफ स्टूडियो और निर्माता-निर्देशक प्रत्या साहा के सहयोग से बनी है। स्टूडियो के संस्थापक कृष्णा और एआई कलाकार अंकुश देवा ने फिल्म के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। स्टूडियो के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत छोटे प्रयोगात्मक वीडियो से हुई थी, जिन्हें कुछ ही सप्ताह में छह करोड़ से अधिक व्यूज मिले। इसी सफलता ने एआई आधारित फिल्म निर्माण को नई दिशा दी। निर्माताओं का कहना है कि एआई और लाइव-एक्शन के संयोजन से फिल्म निर्माण का भविष्य तैयार हो रहा है।
भावनाओं की जगह नहीं ले सकता एआई
प्रत्या साह ने कहा, “हां, यह तो तय है कि एआई कभी भी मानव भावनाओं की जगह नहीं ले सकता है। इंसान के चेहरे पर जिस तरह के हाव-भाव होते हैं, एआई उन्हें निर्मित नहीं कर सकता है, लेकिन नॉन लिविंग थिंग्स में परिवर्तन करके एआई चमत्कार कर सकता है। आने वाले दिनों में इंडस्ट्री में फिल्म निर्माण के पारंपरिक तरीके और नई तकनीक के संगम की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसे हाइब्रिड मॉडल कहते हैं।
कुछ महीनों पहले आयोजित एआई समिट के दौरान फिल्म निर्माता राणा दग्गुबती ने कहा था, पहले फिल्म बनाने से पहले अलग-अलग लोगों की कल्पनाओं को कागज और स्केच तक सीमित रखा जाता था, लेकिन अब एआई की मदद फिल्म के हिस्सों को शूटिंग से पहले विजुअलाइज करके देखा जा सकता है। इससे रचनात्मकता और स्पष्ट हो जाएगी।
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