पहली बार जिम शुरू करने पर क्यों होता है मांसपेशियों में दर्द?

आजकल फिटनेस के लिए जागरूकता बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोग जिम जॉइन कर रहे हैं। लेकिन जिम शुरू करने के शुरुआती दिनों में मांसपेशियों में दर्द, जकड़न और थकान की शिकायत आम होती है। यह दर्द ज्यादातर मामलों में सामान्य होता है और इसे ‘डिलेड ऑनसेट मसल सोरनेस’ कहा जाता है।

यह तब होता है जब शरीर नई एक्सरसाइज या ज्यादा इंटेंसिटी की वर्कआउट के लिए खुद को ढालने की कोशिश करता है। हालांकि, इसके कारण कई लोग शुरुआत में ही एक्सरसाइज करना बंद कर देते हैं, लेकिन डॉ. सना अहमद सैयद (सैयद ऑर्थोपेडिक क्लीनिक, कोंढवा, पुणे) बताते हैं कि सही जानकारी और सावधानियों के साथ इस दर्द से आसानी से निपटा जा सकता है।

क्यों होता है दर्द?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि शुरुआत में हल्का से मध्यम दर्द सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। जब आप लंबे समय बाद या पहली बार वेट ट्रेनिंग या स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करते हैं, तो मांसपेशियों में माइक्रो लेवल पर खिंचाव होता है। यही खिंचाव आगे चलकर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, लेकिन अगर दर्द असहनीय हो, सूजन ज्यादा हो या किसी खास जोड़ में तेज दर्द हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इससे बचाव के लिए क्या करें?
दर्द से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है धीरे-धीरे शुरुआत करना। पहले सप्ताह में हल्के वजन और कम रेपिटेशन से शुरुआत करें। शरीर को समय दें, ताकि वह नए रूटीन के अनुसार ढल सके। अचानक बहुत ज्यादा वजन उठाने या लंबा वर्कआउट करने से चोट का खतरा बढ़ जाता है। ट्रेनर की देख-रेख में सही तकनीक से एक्सरसाइज करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत पोस्टर या तकनीक से मांसपेशियों और जोड़ों पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

वॉर्म-अप और कूल-डाउन भी है जरूरी
वॉर्म-अप और कूल-डाउन को नजरअंदाज करना एक बड़ी गलती है। वर्कआउट से पहले 5-10 मिनट का हल्का कार्डियो और स्ट्रेचिंग मांसपेशियों को तैयार करता है, जिससे चोट और दर्द की संभावना कम होती है। इसी तरह वर्कआउट के बाद हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों में जकड़न कम होती है और रिकवरी तेज होती है।

खान-पान की है अहम भूमिका
सही पोषण और पर्याप्त पानी पीना भी दर्द से उबरने में अहम भूमिका निभाता है। प्रोटीन से भरपूर खाना, जैसे- दाल, पनीर, अंडा या दही, मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करते हैं। साथ ही 7-8 घंटे की नींद लेना जरूरी है, क्योंकि शरीर की रिकवरी मुख्य रूप से आराम के दौरान ही होती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से हल्की पेन किलर दवा या गर्म/ठंडी सिकाई की जा सकती है।

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