कान्हा की शरारत और राधा का प्यार, आखिर क्यों शुरू हुआ रंगों का यह पावन खेल?

होली पर रंग खेलने की परंपरा नई नहीं बल्कि सदियों पुरानी है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का रंग सांवला था और राधा रानी बहुत गोरी थीं। कान्हा जी अक्सर यशोदा मैया से अपनी इस शिकायत को लेकर हठ करते थे। एक बार मैया ने मजाक में कह दिया, ‘जाओ, जो रंग तुम्हें पसंद हो, वह राधा के चेहरे पर लगा दो।’ नटखट कृष्ण ने ऐसा ही किया और देखते ही देखते यह खेल पूरे ब्रज में फैल गया। आज भी ब्रज की होली इसी खूबसूरत प्यार की याद दिलाती है।

होली का धार्मिक महत्व (Holi 2026 Significance)
ऊर्जा का प्रतीक – होलिका दहन के बाद उसकी राख और अग्नि का ताप शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और नकारात्मकता को नष्ट करने में मदद करती है।
समानता का रंग – जब चेहरे पर गुलाल लग जाता है, तो अमीर-गरीब, ऊंच-नीच और जाति-पाति के सारे भेद मिट जाते हैं। हर चेहरा एक ही रंग में रंगा नजर आता है।
रिश्तों की नई शुरुआत – बुरा न मानो होली है केवल एक कहावत नहीं, बल्कि गिले-शिकवे भुलाकर दुश्मनों को भी गले लगाने का एक शुभ अवसर है।

होली के रंगों का महत्व
लाल – प्रेम, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक।
पीला – खुशी, नई उमंग और ज्ञान का रंग।
हरा – हरियाली, शीतलता और नई शुरुआत।
नीला – धैर्य और आध्यात्मिक शांति।

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