हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी का बहुत ज्यादा महत्व है। इसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी आज यानी 27 फरवरी को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और इसकी कथा सुनने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है, तो आइए इसकी पावन कथा का पाठ करते हैं, जो इस प्रकार हैं –
आमलकी एकादशी व्रत कथा
वैदिश नामक एक नगर था, जहां राजा चैत्ररथ का शासन था। उस नगर के सभी लोग विष्णु भक्त थे और विधिवत एकादशी का व्रत करते थे। एक बार आमलकी एकादशी के दिन राजा और समस्त प्रजा मंदिर के पास लगे आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर जागरण और भजन-कीर्तन कर रहे थे। तभी वहां एक भूखा-प्यासा शिकारी आया। वह छिपकर मंदिर में हो रहे पूजन और जागरण को देखने लगा।
पूरी रात उसने अनजाने में ही सही, लेकिन भगवान विष्णु की कथा सुनी और भूखा रहकर जागरण किया। अगले दिन सुबह वह अपने घर चला गया और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। उस शिकारी ने अनजाने में एकादशी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उसका अगला जन्म एक प्रतापी राजा के रूप में हुआ, जिसका नाम वसुरथ था। एक बार राजा वसुरथ जंगल में रास्ता भटक गए और डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया।
लेकिन जैसे ही डाकुओं ने उन पर अस्त्र-शस्त्र चलाए, राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उसने सभी डाकुओं का वध कर दिया। जब राजा की आंख खुली, तो उन्हें पता चला कि यह चमत्कार केवल ‘आमलकी एकादशी’ के अनजाने में किए गए व्रत के शुभ फल से हुआ था।
व्रत और पूजा के लाभ
इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पापों का नाश होता है।
पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत का फल कभी न समाप्त होने वाला होता है।
आंवले के पेड़ में मां लक्ष्मी का भी वासा माना जाता है, इसलिए इस दिन इसकी पूजा से धन से जुड़ी सभी परेशानियां दूर होती हैं।
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