महाशिवरात्रि की रात करें ये काम, विवाह की मुश्किलें होंगी दूर

महाशिवरात्रि की रात को सिद्ध रात्रि माना जाता है। यह वह पावन समय है जब भगवान शिव और माता पार्वती विवाह के बंधन में बंधीं थीं। साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर किसी जातक के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, तो इस रात माता पार्वती की विशेष स्तुति करना बहुत फलदायी हो सकता है। माना जाता है कि जिस प्रकार माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या से महादेव को पति रूप में प्राप्त किया था, उसी प्रकार सच्ची भक्ति से की गई ‘गौरी स्तुति’ विवाह के मार्ग में आने वाले हर कांटे को हटा देती है।

इस चमत्कारी स्तुति का पाठ माता सीता ने भी किया था, जिसका वर्णन रामायण में है, तो जिन कन्याओं के विवाह में देरी हो रही है या जो कन्याएं मनचाहे वर की कामना करती हैं, उन्हें ये दिव्य पाठ जरूर करना चाहिए, जो इस प्रकार है –

।।गौरी स्तुति।।
जय जय गिरिराज किसोरी।

जय महेस मुख चंद चकोरी॥

जय गजबदन षडानन माता।

जगत जननि दामिनी दुति गाता॥

देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।

सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥

मोर मनोरथ जानहु नीकें।

बसहु सदा उर पुर सबही के॥

कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं।

अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥

बिनय प्रेम बस भई भवानी।

खसी माल मुरति मुसुकानि॥

सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ।

बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥

सुनु सिय सत्य असीस हमारी।

पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥

नारद बचन सदा सूचि साचा।

सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।

करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली।

तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

।।गौरी स्त्रोत।।
ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।

हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।।

हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके।

शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।।

मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले।

सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये।।

पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।

पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।।

मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले।

संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।।

देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः।

प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे।।

तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।

वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने।।

मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।

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