फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाने वाली यशोदा जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक है। इस साल यह शुभ अवसर आज यानी 7 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की मैया यशोदा की पूजा करने से जीवन के सभी संकटों का नाश होता है। साथ ही यह उन माता-पिता के लिए बहुत खास दिन है, जिनकी संतान किसी भी तरह के शारीरिक, मानसिक समस्या से जूझ रही है।
ऐसी मान्यता है कि यशोदा माता की पूजा करने से न केवल कान्हा का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि बच्चों के जीवन में आने वाली तमाम बाधाएं भी दूर हो जाती हैं, तो आइए इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –
क्यों खास है यह दिन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन पूजा करने से कुंडली में संतान पक्ष मजबूत होता है। अगर आपका बच्चा बहुत अधिक जिद्दी है, उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता, या वह बार-बार बीमार पड़ता है, तो मैया यशोदा की पूजा-अर्चना करने से ऐसे सभी तरह के दोषों से छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही भगवान कृष्ण की कृपा मिलती है।
इस विधि से करें मां यशोदा की पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
हाथ में जल लेकर अपनी संतान की समस्या को दूर करने का संकल्प लें।
एक वेदी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर माता यशोदा और कान्हा जी की प्रतिमा स्थापित करें।
लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं। मैया यशोदा को लाल चुनरी और शृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
माता यशोदा और कान्हा को माखन-मिश्री, घर की बनी पंजीरी और ताजे फलों का भोग लगाएं।
गाय के घी का दीपक जलाएं और “ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः” का श्रद्धापूर्वक जप करें।
अंत में आरती करें।
पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
करें ये उपाय
नजर दोष के लिए: अगर आपके बच्चे को जल्दी नजर लगती है, तो मैया यशोदा को काली गुंजा या काले धागे चढ़ाएं। फिर उसे पूजा के बाद बच्चे की कलाई पर बांध दें।
एकाग्रता के लिए: पढ़ाई में मन न लगने पर इस दिन बच्चों के हाथों से जरूरतमंद छोटे बच्चों को दूध या सफेद मिठाई का दान कराएं।
स्वास्थ्य के लिए: अगर आपका बच्चा बीमार रहता है, तो माता यशोदा के चरणों में केसर अर्पित करें। फिर उसका तिलक रोज बच्चे के माथे पर लगाएं।
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