मल्टीपल वोट वाले 29.59 लाख मतदाता, निर्वाचन आयोग ने सॉफ्टवेयर से ऑनलाइन डाटा के आधार पर किए चिह्नित

हरियाणा में ऐसे करीब 29.59 लाख मतदाता हैं, जिनकी दो या इससे ज्यादा वोट बनी हुई हैं। निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर ने ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया है। खास बात यह है इनमें से 28.69 लाख मतदाता वे भी पकड़े गए हैं, जिनकी हरियाणा से बाहर यानी अन्य राज्यों में भी वोट बनी हुई है। डीएसई यानी डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्री में चिह्नित हुए ऐसे मतदाताओं की अब धरातल पर जांच होगी, सर्वे के दौरान मतदाता से पूछताछ के बाद उसकी एक सही वोट के अलावा अन्य सभी को काटा जाएगा। इसके लिए बूथ से लेकर प्रदेश स्तर पर कार्य शुरू हो चुका है।

डीएसई के दौरान आयोग के सॉफ्टवेयर ने 40867 मतदाता ऐसे भी चिह्नित किए हैं, जिनकी एक ही बूथ में और 49294 की एक ही विधानसभा क्षेत्र में मल्टीपल वोट बनी हैं। निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, डीएसई में डाटा सिमिलर एंट्री जांची गई हैं। सॉफ्टवेयर ने मतदाता के नाम, पिता या पति के नाम, आयु और पते के आधार पर जिन वोटर का डाटा मैच हुआ, उन्हें चिह्नित किया है। कुछ मतदाताओं की फोटो भी एक जैसी ही पाई गई। बूथ स्तरीय जांच में पता लगाया जाएगा, वर्तमान में यह मतदाता कहां रहते हैं।

करनाल की निर्वाचन तहसीलदार सुदेश राणा का कहना है कि सत्यापन का कार्य बीएलओ के माध्यम से होगा। मतदाता से पूछा जाएगा कि वह किस बूथ या क्षेत्र में अपनी वोट रखना चाहता है अन्य को काट दिया जाएगा। बूथ स्तर पर वोट एक से ज्यादा कैसे बनी है, इसकी भी जांच की जाएगी।

बूथ स्तर पर गुरुग्राम तो ओवरऑल में हिसार में सर्वाधिक वोट
क्षेत्र के हिसाब से नजर डालें तो बूथ स्तर पर गुरुग्राम जिले में 8084 और विधानसभा स्तर पर देखें तो फरीदाबाद जिले में 10921 सर्वाधिक वोट पाई गई हैं। ओवरऑल देखें तो हिसार जिले में सर्वाधिक 273993, सोनीपत में 256957, जींद में 218150, करनाल में 182020 मल्टीपल वोट मिली हैं। इसके अलावा पंचकूला और नूंह में सबसे कम ऐसी वोट हैं। पंचकूला में 37608 और नूंह में 30186 वोट चिह्नित हुई हैं। इन सभी की जांच की जाएगी।

स्थान बदलने के साथ ही बनते गए नए वोट
अधिकारियों का दावा है कि जिन मतदाताओं को डीएसई में चिह्नित किया गया है, इनमें से कोई भी एक चुनाव में दो बार वोट नहीं डाल सकता। कुछ लोगों के वोट उनके नौकरी या कामकाज के कारण स्थान परिवर्तन होने से बने हैं तो कुछ के गांव से शहर में आने पर बने हो सकते हैं। गांव और शहर में बनी अलग वोट का इस्तेमाल पंचायत या निकाय स्तर पर हो सकता है। विधानसभा या लोकसभा चुनाव में एक साथ दो जगह वोट संभव नहीं है।

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