हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत आज यानी 30 जनवरी को रखा जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त प्रदोष काल में महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन से सभी तरह के दुख-दरिद्रता, रोग और दोष का नाश हो जाता है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी स्तुति करते हैं। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से साधक को लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।
पूजन सामग्री लिस्ट
शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर।
चंदन, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा, मदार के फूल, भांग, और शमी के पत्ते।
गाय का घी, रुई की बत्ती, कपूर और धूप।
भस्म, जनेऊ, कलावा और माता पार्वती के लिए चुनरी व शृंगार सामग्री।
पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
पूरे दिन फलाहार रहें और मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस समय दोबारा स्नान कर विधिवत पूजा करें।
शिवलिंग पर पहले गंगाजल चढ़ाएं, फिर पंचामृत से अभिषेक करें।
अंत में शुद्ध जल से स्नान कराएं।
शिव जी को चंदन का तिलक लगाएं। बिल्व पत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।
ध्यान रहे कि बिल्व पत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर होना चाहिए।
खीर का भोग लगाएं।
प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिवजी की आरती करें।
अंत में पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
भोग
महादेव को सफेद रंग की चीजें प्रिय हैं। ऐसे में आप खीर, मखाने की खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा मौसमी फल भी अर्पित करें।
पूजन मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
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