सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, ताकि एक ही जगह पर सुनवाई हो सके।
उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की स्व-अर्जित संपत्तियों के बंटवारे को लेकर उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी परमार के बीच कानूनी जंग तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, ताकि एक ही जगह पर सुनवाई हो सके। इस विवाद में मुख्य रूप से अरविंद सिंह मेवाड़ की फरवरी 2025 में बनाई गई वसीयत शामिल है, जिसमें उन्होंने अपनी सभी स्व-अर्जित संपत्तियां बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को सौंपी थी।
अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था। वसीयत के अनुसार लक्ष्यराज सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशासन पत्र की मांग की, जबकि उनकी बहन पद्मजा कुमारी परमार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में वसीयत की वैधता को चुनौती दी। कुछ रिपोर्टों में बहनों ने पिता की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य पर सवाल उठाए हैं, जिसे लक्ष्यराज सिंह ने खारिज करते हुए अपमानजनक बताया है।
दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार नया पार्टीज का मेमो दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है।
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