मकर संक्रांति के महापर्व पर ओंकारेश्वर धाम में नर्मदा स्नान और ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
मकर संक्रांति के महापर्व पर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले स्थित ओंकारेश्वर धाम एक बार फिर आस्था का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। 14 जनवरी को पवित्र नर्मदा नदी में स्नान और भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सूर्य के उत्तरायण प्रवेश का यह पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसे भारत के उत्तर और दक्षिण दोनों हिस्सों में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
प्रशासन की सख्त तैयारी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। खंडवा कलेक्टर श्री गुप्ता ने ओंकारेश्वर में सभी संबंधित अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन को 14 और 15 जनवरी को नर्मदा नदी का जलस्तर सामान्य बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि स्नानार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
नगर परिषद द्वारा घाटों पर गोताखोरों की तैनाती, सुरक्षा नावों और आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। थाना प्रभारी आलोक सिंधिया ने जिले से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के लिए पत्र जारी किया है। वहीं डिप्टी कलेक्टर एवं मंदिर प्रभारी मुकेश काशिव ने मंदिर कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से ड्यूटी पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान
ओंकारेश्वर के समाजसेवी प्रदीप ठाकुर ने इंदौर संभागायुक्त से अपील की है कि 13 और 14 जनवरी को इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जाए। उनका कहना है कि पूर्व में त्योहारों के दौरान इंदौर के भेरूघाट क्षेत्र में भारी जाम की स्थिति बन चुकी है। उदाहरण के तौर पर 25 दिसंबर 2025 को यहां लगभग आठ घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा था। नेशनल हाईवे के चार लेन बनने तक भारी वाहनों के नियमन की आवश्यकता बताई गई है, ताकि श्रद्धालु सुगमता से ओंकारेश्वर पहुंच सकें।
धार्मिक महत्व
ओंकारेश्वर के प्रसिद्ध ज्योतिर्षाचार्य पंडित अशोक दुबे के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन नर्मदा स्नान, अभिषेक और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। तिल और चंदन युक्त स्नान से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। उनका कहना है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और मां नर्मदा में स्नान का फल असीम है। यह पर्व देवताओं के लोक में प्रवेश और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्रांति को लेकर ओंकारेश्वर धाम में श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जिसके लिए प्रशासन और समाज दोनों मिलकर तैयारियों में जुटे हैं।
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