ईडी ने देश में 5,300 सिम कार्ड की खरीद से जुड़े मामले की जांच शुरू कर दी है। इसका उपयोग कंबोडिया में एक मलेशियाई नागरिक के नेतृत्व वाले गिरोह द्वारा पूरे भारत में साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए किया गया था।
जांच एजेंसी ने पांच जून को लुधियाना के अलावा राजस्थान के किशनगढ़, नागौर और जोधपुर में सात परिसर की तलाशी ली थी। इसी के आधार पर 30 घरेलू बैंक खातों की पहचान हुई। जो इस धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा हैं।
ईडी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया यह मामला जोधपुर पुलिस की उस प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें कुछ पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल्स) विक्रेताओं के खिलाफ भारतीय सिम को धोखाधड़ी से सक्रिय करने और उन्हें एक मलेशियाई नागरिक को सौंपने का आरोप लगाया गया था।
ईडी के अनुसार कंबोडिया के ठगी गिरोहों से जुड़े कई साइबर अपराध के मामले सामने आए हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट भी शामिल है। इन मामलों में भारतीयों को साइबर अपराध के जरिये फंसाया गया है। ईडी ने बताया कि उसने 2.3 लाख नंबरों (सिम कार्ड) का विश्लेषण किया।
इसमें पता चला कि उनमें से लगभग 36 हजार कंबोडिया में सक्रिय थे, जिनमें से लगभग 5,300 का इस्तेमाल वॉट्सएप काल कर पूरे भारत में सैकड़ों करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी करने में किया गया।
एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान सामने आया कि राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट ने प्रकाश भील, रामअवतार राठी, हरीश मालाकार और हेमंत पनवार नामक अन्य सिम विक्रेताओं के साथ मिलकर मलेशियाई नागरिक को सैकड़ों सिम कार्ड की आपूर्ति की।
सिम विक्रेताओं के पास एयरटेल, जियो और वोडाफोन इंडिया जैसे दूरसंचार ऑपरेटरों की पीओएस आईडी थी। आरोपित सिम कार्ड पोर्ट करने या नए सिम जारी करने के बहाने कम पढ़े-लिखे और भोले-भाले लोगों को निशाना बनाते थे।
हालांकि, उक्त सिम को सक्रिय करते समय उन्होंने अतिरिक्त रूप से अन्य सिम भी सक्रिय कर दिए, जिन्हें बाद में राहुल कुमार झा और उनके सहयोगियों के जरिये कमीशन के बदले में मलेशियाई नागरिक को आपूर्ति की गई।
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