हिमाचल जाएंगे कांग्रेस विधायक: राज्यसभा चुनाव से पहले हुड्डा की ‘लंच डिप्लोमेसी’, सता रहा सेंधमारी का डर

हरियाणा कांग्रेस के सभी विधायक शुक्रवार को चंडीगढ़ में लंच कार्यक्रम के बाद हिमाचल जाएंगे। हिमाचल में विधायकों के आगमन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को अपने चंडीगढ़ सेक्टर-7 स्थित आवास पर कांग्रेस विधायकों को लंच के लिए बुलाया है। इसे पार्टी की अहम ‘लंच डिप्लोमेसी’ माना जा रहा है, जहां राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तय होने के साथ क्रॉस वोटिंग के खतरे से निपटने की योजना पर भी चर्चा होगी। चंडीगढ़ में लंच कार्यक्रम के बाद कांग्रेस के सभी विधायक हिमाचल जाएंगे। हिमाचल में विधायकों के आगमन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में इस बात पर सहमति बन सकती है कि मतदान तक कांग्रेस के विधायकों को किसी दूसरे राज्य में सुरक्षित शिफ्ट किया जाए, ताकि संभावित सेंधमारी या दबाव की राजनीति से बचा जा सके। बताया जा रहा है कि कई विधायक पहले ही कुछ दिनों के कपड़े और जरूरी सामान पैक कर चुके हैं और पार्टी के संकेत का इंतजार कर रहे हैं।

दरअसल मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के 37 विधायक हैं और गणित के हिसाब से एक राज्यसभा सीट पार्टी की पक्की मानी जा रही थी। लेकिन तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने से चुनावी समीकरण अचानक बदल गए हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की चूक से बचना चाहता है, क्योंकि यह चुनाव हुड्डा की साख से भी जुड़ा माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार विधायकों की संभावित शिफ्टिंग को लेकर हिमाचल प्रदेश जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है। खास तौर पर महिला विधायकों के लिए फैमिली सुइट की व्यवस्था करने की तैयारी बताई जा रही है। कांग्रेस के सात महिला विधायक हैं, जिनमें विनेश फोगाट, पूजा चौधरी, मंजू चौधरी, गीता भुक्कल, शकुंतला खटक, शैली चौधरी और रेनू बाला शामिल हैं।

ऐसे में हुड्डा की इस लंच मीटिंग पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखते हुए राज्यसभा की बाजी कैसे सुरक्षित करती है।

स्याही कांड
कांग्रेस खेमे में 2016 के राज्यसभा चुनाव की याद भी ताजा है, जब अलग रंग के पेन से वोट डालने के कारण पार्टी के 14 वोट अमान्य हो गए थे। उस विवाद को ‘स्याही कांड’ के नाम से जाना गया और इससे कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसी वजह से इस बार पार्टी नेतृत्व अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

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