हरियाणा में दवा कंपनियों की लूट: कीमत से 68 हजार रुपये महंगी बेची दवाई

हरियाणा में कुछ दवा कंपनियां अपनी दवाइयां सरकार की तरफ से निर्धारित मूल्य से ज्यादा दाम में बेच रही हैं। हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के औचक निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ है। टीम ने एक महीने की जांच के बाद चार दवा कंपनियों की पांच दवाएं पकड़ीं हैं। इनमें से एक दवा का दाम तो तय मूल्य से 68 रुपये ज्यादा लिखा मिला और उसे उसी दाम पर बेचा भी गया। अब ड्रग कंट्रोलर ने इन दवा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एनपीपीए (राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण) को केस भेज दिया है। एनपीपीए निर्धारित कानून के तहत इन पर कार्रवाई करेगी।

हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन दवा की कीमतों की भी निगरानी करता है। विभाग की ओर से जनवरी में पूरे प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पांच दवाइयां ऐसी मिली, जिसके कवर पर जो एमआरपी लिखी थी, वह निर्धारित कीमत से ज्यादा मिली है। इनमें दो दवा कंपनियां हिमाचल और एक दिल्ली व एक सिक्किम की है। ये दवाइयां फंगल इंफेक्शन, एंटीबायोटिक व बैक्टिरियल इंफेक्शन में इस्तेमाल की जाती हैं।

उल्लेखनीय है कि जब भी किसी सॉल्ट की दवा बाजार में उतरती है तो उसकी कीमतें भी तय की जाती हैं। बाकायदा इसकी अधिसूचना भी जारी होती है।

किस दवा में कितना अंतर मिला
दवा अंतर
इट्राकोनाजोल कैप्सूल 100 एमजी 11.82 प्रति स्ट्रिप
लाइनजोलिड 600 एमजी 6.936 प्रति स्ट्रिप
पोटेशियम परमेंगनेट 68.24 प्रति स्ट्रिप
फ्लुकोनाजोल 400 एमजी 16.59 प्रति स्ट्रिप
फ्लुकोनाजोल 200 एमजी 11.41 प्रति स्ट्रिप

टोल फ्री नंबर पर भी कर सकते हैं शिकायत
हरियाणा में दवा की कीमतों पर नियंत्रण के लिए राज्य में प्राइस मॉनिटरिंग एंड रिसोर्स यूनिट (पीएमआरयू) खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग के अंतर्गत सक्रिय रूप से कार्य करती है। इसका मकसद होता है कि आम नागरिकों को दवाएं सरकार की निर्धारित दरों पर ही उपलब्ध हों। इसके लिए हरियाणा सरकार की ओर से एक ट्रोल फ्री नंबर 1800-180-2413 जारी किया गया है।

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