अमेरिका और इजरायल के हमले का सामना कर रहा ईरान सूचना युद्ध के जरिये बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत इंटरनेट मीडिया पर वीडियो और पोस्ट में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का लगातार मजाक उड़ाया जाता है या उन्हें एक रक्तपिपासु नेता के रूप में बदनाम किया जाता है।
उनके बारे में कहा जाता है कि वह नागरिक ठिकानों पर अंधाधुंध हमला करते हैं। इनमें अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर हमलों के बारे में मनगढ़ंत सामग्री शामिल है। बुधवार को न्यूयार्क हार्बर के लिबर्टी द्वीप पर मिसाइल हमले का एक मनगढ़ंत वीडियो भी जारी किया गया। इन सामग्रियों में जेफरी एपस्टीन का भी नियमित रूप से जिक्र किया जाता है।
युद्ध में हुए नुकसान से ध्यान भटकाना
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और चीन की मदद से ईरान एक परिष्कृत सूचना युद्ध छेड़ रहा है। इसका उद्देश्य अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के खिलाफ वैश्विक विरोध का फायदा उठाना और युद्ध के मैदान में ईरान को हुए भारी नुकसान से ध्यान भटकाना है।
बढ़ा-चढ़ाकर फैलाते हैं नैरेटिव
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू हुए एक महीना हो चुका है और ईरान के सरकारी मीडिया और गुप्त एजेंट लगातार दुष्प्रचार में लगे हुए हैं। वे बढ़ा-चढ़ाकर नैरेटिव फैलाते हैं और सरासर गलत सूचनाओं का प्रसार कर रहे हैं।
AI का कर रहें इस्तेमाल
मानवाधिकार संगठनों और विदेशी प्रभाव का अध्ययन करने वाले शोध समूहों के अनुसार, वे अक्सर एआइ उपकरणों का उपयोग करके अधिक से अधिक यथार्थवादी दिखने वाली तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं।
अधिकतर गलत सूचनाओं का खंडन किया जाता है, लेकिन तब तक वे एक्स, ब्लूस्काई, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटाक और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों के जरिये लाखों लोगों तक पहुंच चुकी होती हैं।
वैश्विरक ऊर्जा अर्थव्यवस्था बाधित
जानकारों का कहना है कि सूचना युद्ध ने ईरान के संकटग्रस्त नेतृत्व को एक ऐसा शक्तिशाली हथियार प्रदान किया है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति रोककर विश्व की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को बाधित करने की उसकी क्षमता के लगभग बराबर है। हालांकि, सूचना युद्ध के प्रभाव को मापना कठिन है, विशेषज्ञों का कहना है कि इसने अमेरिका और अन्य देशों में संघर्ष को लेकर लोगों के गुस्से को भड़काया है।
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