प्रधानमंत्री ने साणंद से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हुए भारत के भावी उदय का रोडमैप दर्शाते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर के लिए विख्यात भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपना पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अत्यंत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहा है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने समग्र विश्व को विश्वास दिलाते हुए कहा कि इंडिया ईज रेडी, इंडिया ईज रिलायेबल एंड इंडिया डिलीवर्स।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद के साणंद में माइक्रोन सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का शुभारंभ कराते हुए कहा कि 20वीं शताब्दी का रेगुलेटर ऑइल था, जबकि 21वीं शताब्दी का रेगुलेटर माइक्रोचिप बनेगी। उन्होंने कहा कि यह एआई रिवॉल्यूशन की सदी है। समग्र विश्व में भारत आज कैपेबल, कम्पीटिटिव तथा कमिटेड मित्र एवं भागीदार के रूप में उभर रहा है। लगभग 22,516 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के साथ गुजरात अब देश के ‘सेमीकंडक्टर हब’ के रूप में पहचान स्थापित करेगा। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अत्याधुनिक एटीएमपी (असेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग तथा पैकेजिंग) प्लांट के कामकाज और अन्य विवरण दर्शाने वाली प्रदर्शनी को देखा तथा प्लांट की मुलाकात लेकर सेमीकंडक्टर चिप के असेम्बली व पैकेजिंग के विभिन्न ऑपरेशन्स के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। इससे पहले प्रधानमंत्री ने साणंद जीआईडीसी में आयोजित रोड शो अंतर्गत उपस्थित जनसैलाब का अभिवादन स्वीकार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी एवं सफल एआई समिट के बाद आज हम टेक्नोलॉजी लीडरशिप क्षेत्र में भारत की कटिबद्धता के एक ऐतिहासिक पड़ाव के साक्षी बने हैं। 10-11 वर्ष पहले तक भारत मे डेटा व चिप की चर्चा केवल सीमित वर्गों में ही होती थी और टेक्नोलॉजी के नाम पर हम केवल आईटी सर्विसेज तक सीमित थे, परंतु आज सॉफ्टवेयर के लिए विख्यात भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपनी पहचान सशक्त कर रहा है।
‘मुश्किल में बोए गए बीज आज वटवृक्ष बनकर फल दे रहे हैं’
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन तथा एआई रिवॉल्यूशन को जोड़ने वाला सबसे बड़ा सेतु बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब इस वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। उन्होंने जोड़ा कि कोविड के मुश्किल समय में बोए गए बीज आज वटवृक्ष बनकर फल दे रहे हैं तथा अब तक सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम अंतर्गत 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा लक्ष्य केवल एक फैक्ट्री स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम बनाने का है। भारत अब सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहा है, जिसमें डिजाइन इंजीनियर से लेकर मशीन निर्माता तथा लॉजिस्टिक्स तक के सभी स्तर शामिल हैं। ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ की घोषणा इसी दिशा में उठाया गया कदम है। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे भारत के भीतर ही मटीरियल तथा कम्पोनेंट्स की मांग बढ़ेगी, जो स्थानीय उद्योगों के लिए सबसे बड़ा अवसर सिद्ध होगा।
भारत के बढ़ते जा रहे मार्केट की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स तथा ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत की मांग निरंतर बढ़ रही है। इसलिए ‘मेक इन इंडिया’ अब फुल स्विंग में आगे बढ़ रहा है। पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन तथा उसके निर्यात में अनेक गुना वृद्धि हुई है। भारत अब कम्पोनेंट से लेकर फिनिश्ड प्रोडक्ट तक सभी कुछ देश में बनाने के लिए सज्ज है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए घरेलू बाजार एवं वैश्विक अवसर; दोनों प्रदान करता है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि साणंद तो ऐसी धरती है, जो मिट्टी को भी सोना बना देती है।
‘रतन टाटा के प्लांट के साथ ऑटोमोबाइल क्रांति की शुरुआत’
उन्होंने याद किया कि वे यहां एक समय किस तरह साइकिल पर घूमते थे और एक रुपए के एसएमएस से यहां रतन टाटा के प्लांट के साथ ऑटोमोबाइल क्रांति की शुरुआत हुई थी। आज वही साणंद ग्लोबल मैप पर सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने यहां काम करने के लिए आने वाले देश-विदेश के तकनीशियनों को आश्वस्त किया कि गुजरात सरकार उन्हें श्रेष्ठ जीवनशैली तथा सुविधाएं प्रदान करने में कोई कमी नहीं रखेगी। पर्यावरण एवं टेक्नोलॉजी के समन्वय के बारे में चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने माइक्रोन के प्लांट की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यहां बनाया गया ‘क्लीन रूम स्पेस’ विश्व के सबसे बड़े स्पेस में एक है।
वहीं मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने साणंद में माइक्रोन प्लांट के लोकार्पण को सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम क्षेत्र में नींव का पत्थर बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज गुजरात ग्लोबल मैप पर ग्रोथ इंजन के रूप में चमका है। प्रधानमंत्री के अथक परिश्रम और राज्य की उद्यमिता के कारण ही लार्ज स्केल और जेट स्पीड से इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन संभव हुआ है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस दिन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि भारत ने पिछले छह दशकों से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जो स्वप्न देखा था, वह आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत संकल्प से साकार हुआ है। केवल 900 दिनों में फाउंडेशन से प्रोडक्शन तक का यह सफर ‘मोदी है, तो मुमकिन है’ के नारे को चरितार्थ करता है।
सर्जियो गोर और संजय मेहरोत्रा ने क्या कहा?
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस अवसर को भारत-अमेरिका के मजबूत संबंधों का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह प्लांट केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि अमेरिकन टेक्नोलॉजी और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग उत्कृष्टता के समन्वय का भविष्य है। उन्होंने इस अवसर पर अमेरिकी प्रशासन के सहयोग का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरा है। वहीं माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए भावुक स्वर में कहा, ‘यह केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि इतिहास का एक अमर क्षण है। दिल्ली के सरदार पटेल विद्यालय में पढ़ाई के दौरान लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के दृढ़ संकल्प से मुझे जो प्रेरणा मिली थी, आज साणंद की इस धरती पर उस संकल्प को साकार होते हुए देख रहा हूं। मुझे विश्वास था कि जो कभी नहीं बना, वह हम बना सकते हैं और आज हमने साणंद में वह कर दिखाया है।’
मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट में क्या बनेगा?
उल्लेखनीय है कि माइक्रोन के मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट में एसएसडी (सॉलिड स्टेट ड्राइव), डीआरएएम और एनएएनडी जैसे आधुनिक स्टोरेज और मेमोरी उपकरणों का निर्माण किया जाएगा। ये उत्पाद विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे, क्योंकि मजबूत मेमोरी सपोर्ट के बिना एआई प्रणाली कुशलता से काम नहीं कर सकती। माइक्रोन का यह प्लांट दुनिया के सबसे बड़े और अत्यंत स्वच्छ ‘क्लीन रूम’ वाली इकाइयों में से एक है, जहां ऑपरेशन थियेटर से भी अधिक शुद्ध वातावरण में चिप की पैकेजिंग की जाती है। रोजगार के क्षेत्र में भी यह प्लांट आशा की एक नई किरण लेकर आया है। वर्तमान में यहां 2000 लोगों की टीम कार्यरत है, जो आगामी समय में बढ़कर 5000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार तक पहुंच जाएगी। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि इस प्लांट में दिव्यांग नागरिकों को भी ऑपरेटर एवं टेक्नीशियन के रूप में रोजगार के समान अवसर दिए गए हैं। माइक्रोन के मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन अवसर पर राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया तथा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद एवं विधायकों के साथ ही राज्य के मुख्य सचिव एम. के. दास, विज्ञान एवं प्रौद्योगकी विभाग के सचिव पी. भारती सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।
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