शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के समय में हुआ बदलाव! नया CAS सिस्टम लागू

अगस्त से एक्सचेंज एक नया बदलाव लागू करने जा रहे हैं, जिस पर ट्रेडर्स को ध्यान देना चाहिए। मार्केट रेगुलेटर ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया’ (SEBI) ने उन सिक्योरिटीज के लिए ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ (CAS) का एलान किया था जिनमें F&O ट्रेडिंग की इजाजत है, ताकि क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर करना मुश्किल हो सके। सोमवार से एक्सचेंज F&O स्टॉक्स के लिए वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) से हटकर CAS सिस्टम अपनाएंगे।

क्या बदलेगा?
CAS 15 मिनट का एक नया सेशन होगा जो शेयरों (स्क्रिप्स) की क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच (Stock market new timing) होगा। अब तक, किसी स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस मुख्य रूप से आखिरी 30 मिनट (दोपहर 3:00-3:30 बजे) में हुए ट्रेड की औसत कीमत पर आधारित होती थी। 3 अगस्त से, एक्सचेंज एक फाइनल क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन आयोजित करेगा।

CAS के तहत, खरीद और बिक्री के ऑर्डर एक ही इक्विलिब्रियम प्राइस (संतुलन कीमत) पर इकट्ठा और मैच किए जाएंगे। इक्विटी और डेरिवेटिव मार्केट में ट्रेड करने वाले रिटेल ट्रेडर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि पहले चरण में, यह कदम केवल उन स्टॉक्स पर लागू होगा जिनमें F&O ट्रेडिंग की इजाजत है।

HDFC सिक्योरिटीज के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नंदिश शाह का कहना है कि CAS से इक्विलिब्रियम प्राइस तय करने में मदद मिलेगी, जो अंडरलाइंग स्टॉक के लिए क्लोजिंग प्राइस होगी। उन्होंने कहा कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि यह कदम असल में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप है।

जो स्टॉक्स CAS का हिस्सा नहीं हैं, उनके लिए सामान्य ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे तक जारी रहेगी। इन सिक्योरिटीज के लिए पोस्ट-क्लोजिंग सेशन का समय अब बदलकर दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे कर दिया जाएगा।

क्या इसका असर रिटेल इन्वेस्टर्स पर पड़ेगा?
129 वेल्थ के फंड मैनेजर और पॉल एसेट के रिसर्च एनालिस्ट प्रसेनजीत पॉल ने कहा कि रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए यह काफी हद तक पर्दे के पीछे होने वाला बदलाव है, लेकिन इससे क्लोजिंग प्राइस ज़्यादा सही होंगे, जिससे म्यूचुअल फंड NAV और पोर्टफोलियो वैल्यूएशन ज़्यादा सटीक होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती दौर में यह सिस्टम सिर्फ़ F&O सेगमेंट के स्टॉक्स पर लागू होगा, जबकि ज़्यादातर लिस्टेड स्टॉक्स की ट्रेडिंग पहले की तरह ही होती रहेगी।

सेबी यह बदलाव क्यों कर रहा है?
इस बदलाव का मकसद दो समस्याओं को हल करना है। ज़ेरोधा के फाउंडर नितिन कामथ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि इस कदम का मकसद स्टॉक की कीमतों में हेरफेर को रोकना है।

उन्होंने कहा कि इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स को क्लोजिंग प्राइस से मैच करने के लिए दिन के आखिर में बड़े ऑर्डर पूरे करने होते हैं, और चूंकि इन ऑर्डर्स से कीमतें बदल सकती हैं, इसलिए ट्रैकिंग एरर का रिस्क बढ़ जाता है।

दूसरा, उन्होंने देखा कि आखिरी कुछ मिनटों में दिए गए बड़े ऑर्डर स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस और उन इंडेक्स पर बहुत ज़्यादा असर डाल सकते हैं जिनका वे हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “ऐसी चिंताएं रही हैं कि इसका इस्तेमाल इंडेक्स को कुछ खास क्लोजिंग लेवल तक ले जाने के लिए किया जा सकता है। चूंकि CAS सभी ऑर्डर्स को एक साथ लाता है और उन्हें एक ही कीमत पर मैच करता है, इसलिए क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करना मुश्किल हो जाता है।”

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने कहा, “इससे आखिरी मिनट में होने वाले बड़े इंस्टीट्यूशनल ट्रेड्स का असर कम होता है, प्राइस डिस्कवरी बेहतर होती है, और बेंचमार्क वैल्यूज़ असल मार्केट डिमांड और सप्लाई को बेहतर ढंग से दिखाती हैं। कुल मिलाकर, इससे मार्केट में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।”

इसके अलावा, इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट के लिए, सभी ट्रेडिंग दिनों में ट्रेडिंग पहले के 3:30 बजे के बजाय 3:40 बजे तक जारी रहेगी।

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