शुक्रवार 12 जून को सप्ताह के अंतिम कारोबारी वाले दिन भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ। सभी सेक्टर में बड़े पैमाने पर खरीदारी के बीच निफ्टी 23,600 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स 1,695.40 अंक या 2.30 प्रतिशत बढ़कर 75,527.95 पर (BSE Closed) और निफ्टी 461.30 अंक या 1.99 प्रतिशत बढ़कर 23,622.90 पर बंद (NSE Closed) हुआ।
वहीं, बात करें भारतीय रुपये की तो शुक्रवार को भारतीय रुपया 64 पैसे बढ़कर 95.11 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछली बार यह 95.75 पर बंद हुआ था।
किन शेयरों में ज्यादा गिरावट और किनमें ज्यादा तेजी
निफ्टी में शामिल शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, L&T, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फाइनेंस और टाइटन कंपनी सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे। दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया, ONGC, टेक महिंद्रा, टाटा कंज्यूमर और SBI लाइफ इंश्योरेंस सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयर रहे।
सभी 16 प्रमुख सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे। व्यापक निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 में क्रमशः 1.6 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत की बढ़त हुई।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो सभी इंडेक्स पॉजिटिव जोन में बंद हुए। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी, टेलीकॉम, बैंकिंग, ऑटो, मीडिया, ऑयल एंड गैस और मेटल इंडेक्स में 1-2 प्रतिशत की बढ़त हुई। ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई।
आज क्यों बाजार में आई तेजी
ईरान-अमेरिका तनाव में कमी के चलते भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ ने रिपोर्ट दी है कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में प्रतिबंध हटाना, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी खत्म करना और ईरान के आसपास तैनात अमेरिकी सैन्य बलों को वापस बुलाना शामिल है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड 5% गिरकर 86.4 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो पिछले दो महीनों के निचले स्तर के करीब है।
अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही किसी समझौते के संकेत मिलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 65 पैसे मजबूत होकर 95.20 पर पहुंच गया। और शुक्रवार को रुपया 95.11 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
क्या बोले एक्सपर्ट?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड, विनोद नायर ने कहा- “भारत के लिए यह साल मुश्किल भरा रहा है। अर्थव्यवस्था को पहले अमेरिकी टैरिफ के असर का सामना करना पड़ा और उसके बाद एनर्जी की कीमतों में उछाल से पैदा हुए झटके से जूझना पड़ा। हालांकि दोनों मोर्चों पर हालात बेहतर हुए हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था अभी भी एक मुश्किल दौर से गुजर रही है, जिसमें महंगाई का दबाव, कमजोर मॉनसून और ग्लोबल व घरेलू ग्रोथ की रफ्तार में कमी जैसे कारक शामिल हैं। आने वाले समय में एक अहम बात अमेरिकी फेड की नई पॉलिसी और उसके नए चेयरमैन के तहत बदला हुआ फ्रेमवर्क है। फेड की अगली मीटिंग पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि मार्केट ग्रोथ और लगातार बनी हुई महंगाई के दबाव के बीच संतुलन का आकलन कर रहे हैं। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मज़बूत लेबर मार्केट के बीच आर्थिक स्थिति तो बनी हुई है, लेकिन महंगाई के आसानी से कम न होने के कारण आक्रामक तरीके से ढील देने की गुंजाइश सीमित हो सकती है, जिससे स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है।”
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