वैज्ञानिकों की नई खोज से उम्मीद: खतरनाक बैक्टीरिया के इलाज में 2 एंटीबायोटिक की जुगलबंदी कारगर

अस्पतालों में कई दवाओं से लड़ने वाले खतरनाक बैक्टीरिया अब आम एंटीबायोटिक्स से ठीक नहीं हो पाते। ये गंभीर बीमारियों में बहुत बड़ा खतरा बन जाते हैं। लेकिन, अब एक नई खोज से उम्मीद दिख रही है। 

वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के वैज्ञानिकों के हालिया अध्ययन में पाया गया कि दो एंटीबायोटिक दवाओं सेफ्टाजिडाइम-एविबैक्टम (सीजेडए) और एज्ट्रियोनाम (एटीएम) को साथ में देने से प्रतिरोधी बैक्टीरिया कार्बापेनेम-रेसिस्टेंट एंटरोबैक्टेरेल्स पर अच्छा असर दिखता है। 

अध्ययन अक्तूबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच सेंट्रल इंडिया के एक टर्शियरी केयर अस्पताल में किया गया। शोध का उद्देश्य यह जानना था कि कार्बापेनेमेज बनाने वाले एंटरोबैक्टेरेल्स बैक्टीरिया के खिलाफ सीजेडए और एटीएम का संयोजन कितना प्रभावी है और कौन-सी प्रयोगशाला तकनीक इस प्रभाव को सबसे सही तरीके से दिखा सकती है। अध्ययन में कुल 60 बैक्टीरिया के नमूने शामिल किए गए। इनमें अधिकांश में ब्लाएनडीएम जीन पाया गया, जो बैक्टीरिया को कई दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बनाता है। 

यह जीन गंभीर संक्रमणों के इलाज को कठिन बना देता है और अस्पतालों में मरीजों के लिए खतरा बढ़ा देता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि लगभग 73 प्रतिशत नमूनों में सीजेडए और एटीएम दवाओं का संयोजन सकारात्मक प्रभाव (सिनर्जी) दिखाता है। 

ई-स्ट्रिप तरीका सबसे सटीक
नतीजों में पाया गया कि ई-स्ट्रिप तरीका सबसे सटीक है और इसके परिणाम बीएमडी से लगभग पूरी तरह मेल खाते हैं। हालांकि, इसकी कीमत अधिक है। प्रक्रिया थोड़ी जटिल होने के कारण यह हर लैब के लिए व्यावहारिक नहीं हो सकता। वहीं, डिस्क रिप्लेसमेंट और इनवर्स डी-जीन तरीके अपेक्षाकृत सस्ते, आसान और भरोसेमंद पाए गए। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त करता है और भविष्य में मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा।

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