वेदांता वाले अनिल अग्रवाल की चेतावनी; दिया ₹2.30 लाख करोड़ का तगड़ा फॉर्मूला!

“अगर भारत ने समय रहते बड़े कदम नहीं उठाए, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 30 करोड़ टन स्टील उत्पादन (India Steel Production Target) का सपना अधूरा रह सकता है।”

यह कहना है- वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का, जिन्होंने भारत के स्टील सेक्टर को लेकर एक बड़ी चेतावनी (Anil Agarwal Steel Warning) जारी की है।

सालाना 80 करोड़ टन की जरूरत
उन्होंने साफ किया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें सालाना 80 करोड़ टन लौह अयस्क (Iron Ore Shortage India) की जरूरत होगी, लेकिन मौजूदा हालात में हमें अपनी जरूरत का 75% लोहा विदेशों से आयात (Iron Ore Import Dependency India) करना पड़ सकता है।

विदेशी कंपनियों का दबदबा और भारत की चुनौती
अनिल अग्रवाल ने दुनिया के बाजार का गणित समझाते हुए कहा कि आज दुनिया के 70% से 80% लौह अयस्क पर सिर्फ ‘वेल’, ‘बीएचपी’ और ‘रियो टिंटो’ जैसी 4-5 बड़ी कंपनियों का कब्जा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि,

भारत के पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है कि वो देश में ही ऐसी 3-4 बड़ी कंपनियां खड़ी करे, जो हर साल 20 से 30 करोड़ टन उत्पादन (300 Million Ton Steel Vision) करने की क्षमता रखती हों। इसके लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और भारी निवेश की जरूरत है।”

25 अरब का भारी निवेश और ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’
अनिल अग्रवाल का कहना है कि, इस सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 20 से 25 अरब डॉलर (भारतीय करेंसी में करीब 2.31 लाख करोड़ रुपए) के निवेश की दरकार है।

उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि भारत की जमीन के नीचे छिपा खजाना दुनिया के किसी भी देश से बेहतर है, बस उसे निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाना होगा।

उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार ने तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ (स्व-प्रमाणन) की अनुमति दे दी है। भारत को भी इसी रफ्तार से क्लीयरेंस और नियमों को सरल बनाना होगा।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर
वेदांता प्रमुख ने कहा कि ‘बिलो-द-ग्राउंड’ यानी खनिज संपदा सेक्टर में विकास का मतलब है बड़े पैमाने पर नौकरियों की बौछार। उन्होंने तर्क दिया कि जहां भी कंपनियों ने बड़े स्तर पर उत्पादन किया है, वहां के लोगों का जीवन स्तर सुधरा है।

अगर भारत को स्टील के मामले में ‘आत्मनिर्भर’ बनना है, तो हमें पुराने ढर्रे को छोड़कर बड़े विजन के साथ काम करना होगा, वरना हम विदेशी कंपनियों पर निर्भर होकर रह जाएंगे।

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