राष्ट्रपति पेजेशकियान से भी ज्यादा प्रभाव, बिना इजाजत के ईरान में पत्ता भी नहीं हिलता था… 

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और ईरानी राजनीति के प्रमुख स्तंभों में से एक अली लारीजानी की मौत विनाशकारी आघात साबित हो सकती है। यह ईरान के लिए युद्ध की शुरुआत में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को खोने से भी कहीं बड़ा झटका होगा।

ईरानी नेतृत्व को खत्म करने के किसी भी प्रयास में लारीजानी हमेशा से एक प्रमुख निशाना रहे। इसकी मुख्य वजह राजनीति के कई स्तरों पर अपनी पकड़ बनाए रखने की उनकी क्षमता और न केवल ईरान में बल्कि चीन और रूस जैसे विदेशी देशों में भी उनका जबरदस्त निजी प्रभाव था।

कौन थे लारीजानी?
अली लारीजानी पिछले कुछ सप्ताह से ईरान की सत्ता के सबसे प्रभावशाली चेहरों में उभरकर सामने आए थे। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की अमेरिकी-इजरायली हमलों में मौत के बाद लारीजानी ने व्यवहारिक रूप से देश की रणनीतिक कमान संभाल ली थी।
वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख होने के साथ युद्ध, आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति के प्रमुख निर्णयों के केंद्र में थे। अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता की रूपरेखा तैयार करने और संभावित युद्धकालीन प्रशासनिक ढांचे पर भी उनकी सीधी पकड़ थी।
खामेनेई के करीबी विश्वस्त माने जाने वाले 67 वर्षीय लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आक्रामक रुख अपनाया और लगातार इंटरनेट मीडिया पर कड़े संदेश जारी किए।
खामेनेई के उत्तराधिकारी बनने की अटकलों के बावजूद वे सुप्रीम लीडर नहीं बन सकते थे, क्योंकि वे वरिष्ठ शिया धर्मगुरु नहीं थे। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की तुलना में लारीजानी को अधिक प्रभावशाली माना जाने लगा था।
ईरानी मीडिया के अनुसार इंटरनेट प्रतिबंधों जैसे फैसलों में भी अंतिम सहमति उन्हीं से लेनी पड़ रही थी। इससे स्पष्ट हुआ कि युद्धकाल में वास्तविक शक्ति का केंद्र राष्ट्रपति भवन नहीं, बल्कि सुरक्षा परिषद बन चुकी थी।
ईरानी सुरक्षा मामलों के जानकार हामिदरेजा अजीजी ने शीर्ष ईरानी नेताओं की हत्या के इजरायली रुख पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद शीर्ष स्तर पर आम सहमति बनाने में लारीजानी अहम भूमिका निभा सकते थे। उनके बाद ईरान में कट्टरपंथी और मजबूत होंगे।
सर्वोच्च नेता बनने के लिए जरूरी धार्मिक प्रशिक्षण के बिना भी लारीजानी ने ईरानी उच्च राजनीति के गलियारों में अपनी जगह बनाई और अपने भाइयों के साथ मिलकर एक प्रमुख वैचारिक और व्यावहारिक शक्ति बन गए। उनके भाई सादेग न्यायपालिका के प्रमुख थे, जबकि दूसरे भाई मोहम्मद जवाद एक राजनयिक और सर्वोच्च नेता के सलाहकार के तौर पर काम करते थे।
लारीजानी ने सरकारी प्रसारण संस्था के प्रमुख के तौर पर काम किया और इस पद का इस्तेमाल सुधारवादी आंदोलन की कड़ी आलोचना करने के लिए किया। इसके बाद, 2008 से 2020 के बीच 12 उथल-पुथल भरे सालों तक वे संसद के स्पीकर रहे।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल के दौरान 2006 में उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन से संपर्क साधा था लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली थी।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com