अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में भव्य राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की शुरुआत के साथ ही रामलला के लिए भक्तों ने दिल खोलकर दान दिया है. ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों की मानें तो अकेले मंदिर निर्माण के लिए देशभर में शुरू किए गए समर्पण निधि अभियान में ही राम भक्तों ने लगभग 700 करोड़ रुपये की धनराशि समर्पित की है. इस भारी भरकम राशि में से ट्रस्ट ने SBI की अयोध्या ब्रांच में 500 करोड़ की एफडी भी कराई है.

अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नजर भारत से बाहर रह रहे विदेशी दानदाताओं पर है. इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद ट्रस्ट ने स्टेट बैंक आफ इंडिया के दिल्ली स्थित मुख्य ब्रांच पर अकाउंट भी खोल दिया है. इस खाते के संचालन का दायित्व तीन लोगों को सौपा गया है.
जनवरी में शुरू किया था अभियान
इसमें से एक तो ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास की अस्वस्थता की स्थिति में सारा कामकाज देख रहे महासचिव चम्पत राय हैं. दूसरे उनके विश्वस्त ट्रस्टी डाक्टर अनिल मिश्र और ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि हैं. इनमें से किसी भी दो सदस्य की सहमति यानि हस्ताक्षर से ही खाते का संचालन हो जाएगा.
आपको बता दे कि देशभर में 15 जनवरी से 27 फरवरी 2021 तक रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान चलाया गया था. खास बात यह है कि देशभर में कई स्थानों पर मुस्लिमों ने भी निधि समर्पण अभियान में भाग लिया था और समर्पण भी किया.
खुद अयोध्या में समाजसेवी बबलू खान के नेतृत्व में निधि समर्पण अभियान शुरू किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया था. इसी तरह बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने भी मंदिर निर्माण के लिए गुप्त दान दिया था. इनके अलावा भी कई प्रमुख मुस्लिम चेहरे अयोध्या आये थे और अपने अंश का समर्पण किया. कुछ यही हाल देश के अन्य हिस्सों में भी रहा था.
हिसाब करने के लिए बड़ी टीम
निधि समर्पण अभियान की समाप्ति के बाद से देशभर में जिलास्तर पर संकलित निधि के ऑडिट का कार्य शुरू हुआ. इसके लिए एक बड़ी टीम का गठन हुआ जिसमें कई चार्टेड अकाउंटेंट भी शामिल थे. इसी दौरान बड़ी मात्रा में निधि समर्पण अभियान के तहत मिले ऐसे चेकों का भी पता चला था जो किसी न किसी तकनीकी कमी के चलते क्लीयर नहीं हुए थे. लिहाजा उक्त दानदाताओं से संपर्क कर ऐसे चेकों को क्लीयर कराया गया था.