युवाओं को भा रहा सेना का कोना, नंदन-चंपक की यादों के बीच किताबों के संसार में भक्ति की बयार

इस वर्ष पुस्तक मेले का थीम पवेलियन ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं विवेक’ पर आधारित है, जो पूरी तरह राष्ट्रभक्ति के रंग में डूबा हुआ नजर आया।

कड़ाके की ठंड के बावजूद विश्व पुस्तक मेले के दूसरे दिन भारी संख्या में लोग पहुंचे। भारत मंडपम में सुबह से ही प्रवेश के लिए लंबी कतारें लग गईं। मेले के अंदर हर ओर रौनक नजर आई। खासतौर पर युवा बड़ी संख्या में मेले में पहुंचे और किताबों के साथ-साथ थीम पवेलियन में बने ‘सेना के कोने’ की ओर खूब आकर्षित हुए। इस वर्ष पुस्तक मेले का थीम पवेलियन ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं विवेक’ पर आधारित है, जो पूरी तरह राष्ट्रभक्ति के रंग में डूबा हुआ नजर आया। प्रदर्शनी में भारतीय सेना के गौरवशाली अतीत से लेकर आधुनिक सैन्य शक्ति तक का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया है। यहां प्राचीन भारतीय युद्धकला की झलकियों के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की पहचान बन चुके अर्जुन टैंक, लड़ाकू विमान तेजस और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के मॉडल लगाए गए हैं।

इसके अलावा कारगिल युद्ध और भारतीय सेना की ऐतिहासिक जीतों से जुड़े मॉडल भी युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। युवा इन मॉडलों के साथ-साथ वहां मौजूद सैन्यकर्मियों के साथ सेल्फी लेते नजर आए। थीम पवेलियन में वर्ष 1947 से लेकर 1971 तक के युद्धों की जानकारी, परमवीर चक्र विजेताओं की वीरगाथाएं और उनके योगदान को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार और लेफ्टिनेंट योगेंद्र सिंह जैसे वीर सैनिकों के चित्र और साहसिक किस्से पढ़कर दर्शक भावुक होते दिखे। वर्ष 1923 में के. तेजेंद्र द्वारा निर्मित ऐतिहासिक ‘वंदे मातरम’ चित्र भी लोगों का ध्यान खींच रहा है।

चंपक, नंदन, ध्रुव ने पुरानी यादों को किया ताजा

चंपक, नंदन और कैप्टन ध्रुव ने अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में आए कई लोगों की पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला पाठकों को इंटरनेट के युग से पहले के दौर में ले आया है। यह कहना है सरोजिनी नगर से पुस्तकें खरीदने आए अंकित सिंह का। पुस्तक मेले में इस बार चाचा चौधरी से लेकर चंटू-बंटू के चुटकुले की कॉमिक्स पुराने दौर की यादों को ताजा करने का काम कर रही हैं। डिजिटल युग में पुस्तक पढ़ने का चलन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, लेकिन इस बार पुस्तक मेले ने लोगों को वापस पुस्तकों को खींचने में सफलता हासिल की है। खास बात यह है कि युवाओं व बच्चे ही नहीं बल्कि बुजुर्ग भी कॉमिक्स बुक के दीवाने हैं।

कैप्टन ध्रुव व नागराज जैसे सुपरहीरो, फैंटम, अंकुर, पिंकी, जंगल लव, टिंकल, नंदन, बाल हंस, चंपक, व अकबर और बीरबल, पंचतंत्र, चंदामामा और नन्हें सम्राट समेत अन्य 5 जैसी कॉमिक्स की पुरानी व नई प्रतियां बिक रही हैं। एक दौर था, जब चाचा चौधरी, बिल्लू जैसी कॉमिक्स ही मनोरंजन का साधन हुआ करती थीं। बदरपुर से अपनी बेटी के साथ आई पिंकी देवी ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में जब मोबाइल और स्क्रीन बच्चों का मुख्य मनोरंजन बन चुके हैं, ऐसे में पुरानी और नई कॉमिक्स को फिर से हाथों में देखकर बहुत खुशी हो रही है। कैप्टन ध्रुव, नागराज, फैंटम से लेकर चाचा चौधरी और बिल्लू तक, ये कॉमिक्स हमारी बचपन की यादों को ताजा कर देती हैं।

युवाओं और बुजुर्गों को याद आ रहा अपना बचपन

कई अभिभावक भी स्टॉल पर अपने बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। नजफगढ़ से आए हुकुम सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में इंटरनेट पैर पसार रहा है। ऐसे में बच्चों को इन कॉमिक्स के बारे में बताना बहुत जरूरी है। कॉमिक्स हर उम्र के लोगों पर फिट बैठती थी। कई बार बच्चे इन कॉमिक्स में छपी कहानियों को सुने बिना सोने से ही मना कर देते थे।

सोशल मीडिया खत्म कर रहा बचपन

मेले में कॉमिक्स लेकर पहुंचे पुस्तक विक्रेताओं और प्रकाशकों का कहना है कि सोशल मीडिया ने बच्चों का बचपन काफी हद तक छीन लिया है। अब वह अलग प्रकार से अपना मनोरंजन करते हैं। ज्यादातर बच्चे सोशल मीडिया के प्रभाव में युवाओं के विषयों वाले मनोरंजन के साधनों को अपना रहे हैं।

पुस्तक मेले में युवाओं ने साहित्य के समुद्र में लगाया गोता

विश्व पुस्तक मेले में इस बार युवाओं की जबरदस्त भागीदारी के कारण खास चर्चा में है। किताबों के इस महाकुंभ में न केवल पाठकों की संख्या बढ़ी है, बल्कि युवाओं की सक्रिय मौजूदगी ने साहित्य को नई ऊर्जा और नया स्वरूप भी दिया है। मेले के हर कोने में युवाओं की चहल-पहल साफ देखी जा सकती है, जो किताबें खरीदते, लेखकों से संवाद करते और साहित्यिक चर्चाओं में भाग लेते नजर आ रहे हैं। मेले में बनाए गए युवा कॉर्नर युवाओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। कविता पाठ, कहानी वाचन, किताबों पर चर्चा और लेखन कार्यशालाओं में युवाओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इससे यह स्पष्ट है कि डिजिटल युग के बावजूद किताबों के प्रति युवाओं का लगाव कम नहीं हुआ है।

मेले में आयोजित लेखक संवाद कार्यक्रमों में युवा लेखकों ने अपनी रचनाओं, अनुभवों और संघर्षों को साझा किया। इन सत्रों में मौजूद युवाओं ने न केवल सवाल पूछे, बल्कि अपने विचार भी खुलकर रखे। इससे साहित्यिक संवाद को नई दिशा मिली है। कई युवा लेखकों ने कहा कि ऐसे मंच उन्हें प्रेरणा देते हैं और आगे लिखने के लिए उत्साहित करते हैं। मेले में उपन्यास, कविता, कहानी, आत्मकथा, करियर, तकनीक और समसामयिक विषयों से जुड़ी किताबों की ओर युवाओं का खास रुझान देखने को मिल रहा है। हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी और अन्य भाषाओं की पुस्तकों की भी अच्छी बिक्री हो रही है।

साहित्य अकादमी ने किए कई आयोजन

विश्व पुस्तक मेला के अंतर्गत शनिवार को साहित्य अकादमी की ओर से दो कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ एवं ‘कविता-पाठ’ हॉल संख्या-2 स्थित लेखक मंच पर आयोजित किए गए। ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी की प्रख्यात लेखिका अनामिका और असमिया की चर्चित लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी ने भाग लिया। दोनों लेखिकाओं ने पाठकों के साथ अपनी रचना-प्रक्रिया साझा करते हुए अपनी रचनाओं का पाठ भी किया।

अनामिका ने कहा कि अपने बारे में बात करना विशेष रूप से कस्बाई परिवेश की स्त्री के लिए आसान नहीं होता। उन्होंने कविता के स्वभाव को स्त्री के स्वभाव से जोड़ते हुए कहा कि कविता इशारों में बोलती हैं। यही स्त्री जीवन का शिल्प भी हैं। उन्होंने 1971 के युद्ध के दौरान देखे गए ‘ब्लैकआउट’ को अपने लेखन का पहला दृश्यबंध बताया और कहा कि साहित्य का कार्य घनघोर अंधकार में भी प्रकाश फैलाना है। उन्होंने ग्राम्य जीवन पर आधारित अपनी प्रसिद्ध कविता ‘कमरधनिया’ का पाठ किया।

वहीं, अनुराधा शर्मा पुजारी ने कहा कि वे संयोगवश लेखिका बनीं। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने लेखन आरंभ किया। उन्होंने बताया कि उनके लेखन में दुख और करुणा का स्वर इसलिए अधिक है क्योंकि वह हाशिए पर खड़े लोगों के जीवन पर लिखती हैं। अकेलेपन और प्रकृति से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने आत्मकथात्मक संस्मरणों के अंश भी प्रस्तुत किए।

आयोजित कविता-पाठ कार्यक्रम में कवि रश्मि भारद्वाज, हेमंत कुकरेती, रमेश प्रजापति और मनोहर बाथम ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। रश्मि भारद्वाज ने ‘लाल’, ‘विसर्जन’, ‘भूख’ सहित स्त्री विमर्श से जुड़ी कविताओं का पाठ किया। हेमंत कुकरेती ने ‘दीवारें’, ‘बोलते थे सब’ और ‘जन्म न मृत्यु’ कविताओं से मानवीय संबंधों पर विचार प्रस्तुत किए। रमेश प्रजापति ने ‘पानी का वैभव’, ‘युद्ध’, ‘मकई की हंसी’, ‘दुख’ सहित कई कविताएं सुनाईं। मनोहर बाथम ने मानव तस्करी विषय पर आधारित अप्रकाशित एवं प्रकाशित कविताओं का पाठ किया।

किताबों के महाकुंभ में उमड़ा भक्ति का सैलाब

विश्व पुस्तक मेला पाठकों को खूब आकर्षित कर रहा है। किताबों के इस महाकुंभ में हर उम्र के पाठकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शब्दों की दुनिया और धार्मिक साहित्य की ओर से काफी लोग आकर्षित हो रहे हैं। मेले में धार्मिक पुस्तकें खरीदने के लिए युवाओं में उत्साह दिखाई दिया। रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों को खरीदने के लिए मेले में युवाओं की भीड़ रही।

डिजिटल युग में भी युवा रामचरितमानस, भगवद्गीता, वेद-पुराण और अन्य धार्मिक व आध्यात्मिक ग्रंथों में रुचि दिखा रहे हैं। गीता प्रेस समेत धार्मिक पुस्तकों के स्टॉल पर सबसे अधिक भीड़ देखी जा रही है। विक्रेताओं ने बताया कि युवाओं का ध्यान धार्मिक पुस्तकों की ओर खींचा आ रहा है। कई प्रकाशक पुस्तकों पर विशेष छूट भी दे रहे हैं, जिससे पाठकों में उत्साह और बढ़ गया है। मेले में युवा लेखक भी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। वे अपनी लिखी पुस्तकों के माध्यम से धर्म और अध्यात्म का प्रचार कर रहे हैं। लेखक अम्बुज ने बताया कि सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने का अब समय आ गया है।

धार्मिक पुस्तकों की ओर बढ़ा युवाओं का रुझान

मेले में साहित्य, इतिहास, विज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, बच्चों की किताबों, उपन्यास, कविता और आत्मकथा से लेकर धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तकों तक की बड़ी रेंज मौजूद है। दुकानदार प्रवीण ने बताया कि धार्मिक पुस्तकों की ओर युवाओं का रुझान बढ़ा है। स्टॉल पर हिंदी सीखने की व्याकरण की किताबें भी मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वेद पुराण और अन्य धार्मिक किताबों की ओर जेन जी का क्रेज वाकई पुस्तक मेले को सफल बनाता है। वहीं, मथुरा से किताबों का स्टॉल लगाने आई राखी ने बताया कि प्रेमानंद महाराज के कारण युवा भक्ति के मार्ग पर हैं।

पुस्तक मेले में किताब अग्निपथ नहीं जनपथ का पांचवां संस्करण का विमोचन

विश्व पुस्तक मेले में रविवार को भाजपा नेता डॉ. सतीश पूनिया की किताब अग्निपथ नहीं जनपथ का पांचवां संस्करण का विमोचन हुआ। यह किताब जयपुर के वेरा प्रकाशन से छपी है। भाजपा हरियाणा के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने इस किताब में 2018 से 2023 तक अपने विधायक कार्यकाल के अनुभव को लिखा है। किताब में विधानसभा की कार्यप्रणाली, जनता के मुद्दे, युवाओं और किसानों की समस्याएं, कोरोना काल में मोदी सरकार के काम और उस समय की कांग्रेस सरकार की नीतियों पर विस्तार से बताया गया है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने किताब का विमोचन किया। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह किताब एक मजबूत दस्तावेज है और डॉ. पूनिया ने न सिर्फ अच्छे राजनेता, बल्कि लेखक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। उनका धर्मांतरण विरोधी बिल कानून बनना किसी विधायक के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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