मैं अपने जीवन में बहुत लंबे अरसे तक एक परिव्राजक के रूप में रहा : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। यह उनके रेडियो कार्यक्रम की 69वीं कड़ी है। इसे आकाशवाणी और दूरदर्शन के समूचे नेटवर्क पर प्रसारित किया जा रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए लोगों को संबोधित किया था।

मैं कथा सुनाने वाले सबसे आग्रह करूंगा कि हम आजादी के 75 वर्ष मनाने जा रहें हैं, क्या हम हमारी कथाओं में पूरे गुलामी के कालखंड की जितनी प्रेरक घटनाएं हैं उनको, कथाओं में प्रचारित कर सकते हैं। विशेषकर 1857 से 1947 तक, हर छोटी-मोटी घटना से अब हमारी नई पीढ़ी को कथाओं के द्वारा परिचित करा सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आप लोग जरूर इस काम को करेंगे।

बंगलूरू में एक विक्रम श्रीधर हैं, जो बापू से जुड़ी कहानियों को लेकर बहुत उत्साहित हैं, और भी कई लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे होंगे- आप जरूर उनके बारे में सोशल मीडिया पर शेयर करें।

मुझे http://gaathastory.in जैसी वेबसाइट के बारे में जानकारी मिली, जिसे अमर व्यास और उनके साथी चलाते हैं, अमर व्यास आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद विदेश चले गए, वापिस आए और समय निकालकर कहानियों से जुड़े रोचक कार्य कर रहे हैं।

चेन्नई की श्रीविद्या वीर राघवन भी हमारी संस्कृति से जुड़ी कहानियों को प्रचारित, प्रसारित, करने में जुटी हैं। वहीं कथालय और द इंडियन स्टोरी टेलिंग नेटवर्क नाम की दो वेबसाइट भी इस क्षेत्र में जबरदस्त कार्य कर रही हैं।

कहानियां लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं, उसे प्रकट करती हैं। मैं अपने जीवन में बहुत लंबे अरसे तक एक परिव्राजक के रूप में रहा। घुमंत ही मेरी जिंदगी थी। हर दिन नया गांव, नए लोग, नए परिवार।

हमारे यहां तरह-तरह की लोक-कथाएं प्रचलित हैं। मैं देख रहा हूं कि कई लोग किस्सागोई की कला को आगे बढ़ाने के लिए सराहनीय पहल कर रहे हैं।

साथियो, भारत में कहानी कहने की, या कहें किस्सागोई की एक समृद्ध परंपरा रही है। पूरे भारत में कई भारतीय कहानी सुनाने की कला को लोकप्रिय बना रहे हैं। इन दिनों, विज्ञान से संबंधित कहानियों को लोकप्रियता मिल रही है।

कहानियों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी की मानव सभ्यता। कहानियां लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्षा को सामने लाती हैं, उसे प्रकट करती हैं। कहानी की ताकत को महसूस करना हो तो जब कोई मां अपने छोटे बच्चे को सुलाने के लिए या फिर उसे खाना खिलाने के लिए कहानी सुना रही होती है तब देखें।

हमें जरूर एहसास हुआ होगा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधाएं बनाई थीं वो आज भी कितनी महत्वपूर्ण हैं और जब नहीं होती हैं तो कितनी कमी महसूस होती है। ऐसी ही एक विधा जैसा मैंने कहा, कहानी सुनाने की कला है।

इतने लंबे समय तक, एक साथ रहना, कैसे रहना, समय कैसे बिताना हर पल खुशी भरा कैसे हो? तो कई परिवारों को दिक्कतें आईं और उसका कारण था।

कोरोना के इस कालखंड में पूरी दुनिया अनेक परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। आज, जब दो गज की दूरी एक अनिवार्य जरूरत बन गई है को इसी संकट काल ने परिवार के सदस्यों को आपस में जोड़ने और करीब लाने का काम भी किया है।

 

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com