मानसून में तापमान और आर्द्रता से बढ़ सकता है हीट स्ट्रेस

भारत में मानसून के मौसम में उच्च आर्द्रता (नमी) और गर्मी मिलकर “असहनीय हीट स्ट्रेस” (गर्मी का तनाव) को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकते हैं, जब वैश्विक तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है।

उमस भरी गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है

जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून ब्रेक (बारिश के बीच के शुष्क दिनों) में उमस भरी गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे लगभग 1.2 अरब लोग तक प्रभावित हो सकते हैं। एक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है।

गर्मी का तनाव कर रहा प्रभावित

अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (एजीयू) एडवांसेज में प्रकाशित निष्कर्षों में कहा गया है कि जलवायु के गर्म होने के साथ मानसून के मौसम (जुलाई-अक्टूबर) के दौरान असहनीय गर्मी के तनाव में वृद्धि हो रही है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर और अमेरिका के स्टैनफोर्ड और पर्ड्यू विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने कहा कि गर्मी का लंबे समय तक बना हुआ तनाव जो गर्मी और मानसून दोनों मौसमों में होता है जन स्वास्थ्य, श्रम उत्पादकता और घनी आबादी वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन के लिए गंभीर चुनौतियां पेश कर सकता है।

असहनीय गर्मी का तनाव तब होता है जब शरीर अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता के कारण पसीना बहाने या अन्य तंत्रों के माध्यम से ठंडा नहीं हो पाता। गर्मी का लगातार संचय मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है, जिसमें गर्मी से संबंधित बीमारियां, अंगों का फेल होना और मृत्यु शामिल हैं।

बढ़ गया क्षेत्रफल

अध्ययन में दिखाया गया है कि 1979-2021 के दौरान असहनीय गर्मी का तनाव अधिक बार हो रहा है और यह भारत के अधिक क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। 1980 के दशक में .1 लाख वर्ग किमी से बढ़कर 2020 में 0.4 लाख वर्ग किमी हो गया है।

गर्मी के महीनों (मार्च-जून) के दौरान असहनीय गर्मी का तनाव अधिक प्रचलित पाया गया, जो भारत के आठ प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है और वार्षिक गर्मी से संबंधित मृत्यु दर से अधिक मजबूत संबंध रखता है, मानसून के मौसम के दौरान केवल एक प्रतिशत प्रभावित पाया गया।

लेखकों ने लिखा कि हालांकि, मानसून का मौसम (जुलाई-अक्टूबर) यूएचएस, जो मुख्य रूप से गर्म आर्द्र परिस्थितियों द्वारा विशेषता है जलवायु के गर्म होने के साथ तेजी से बढ़ने की संभावना है और यह देश के लगभग समान क्षेत्रों को प्रभावित करेगा जैसे गर्मी का मौसम (गर्मी में 60 प्रतिशत और मानसून में 53 प्रतिशत) दो डिग्री तापमान में वृद्धि के सापेक्ष है।

गंगा के मैदान और तटीय इलाकों में प्रभाव

इलाके के हिसाब से देखें तो, असहनीय गर्मी का तनाव का प्रभाव मुख्य रूप से भारत के गंगा के मैदान और तटीय इलाकों में होता है। इसकी वजहें हो सकती हैं- ज्यादा तापमान और बंगाल की खाड़ी से आने वाली प्री-मानसून हवाओं के ज़रिए जमीन की तरफ नमी का आना के साथ ही कुछ अन्य कारण भी।

इसके विपरीत शोधकर्ताओं ने पाया कि मानसून का मौसम मुख्य रूप से 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच के संकीर्ण वायु तापमान रेंज में आर्द्र असहनीय गर्मी का तनाव का अनुभव करता है। टीम ने कहा कि मानसून के मौसम का असहनीय गर्मी का तनाव देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के पंजाब राज्य में हुआ है।

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