क्या आप जानते हैं कि कभी समुद्र का पानी दूध जैसा मीठा था? लेकिन, एक श्राप ने उस मीठे पानी को खारा कर दिया। जानिए माता पार्वती की उस पौराणिक कथा के बारे में, जिसने समुद्र को हमेशा के लिए खारा बना दिया।
हिंदू धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं में सृष्टि के रहस्यों को लेकर कई रोचक कहानियां मिलती हैं। आज हम जिस समूद्र को विशाल और असीमित खारे पानी के भंडार के रूप में देखते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वह हमेशा से ऐसा नहीं था। एक समय था जब समुद्र का पानी दूध की तरह सफेद और शहद जैसा मीठा हुआ करता था। लेकिन, माता पार्वती के एक श्राप ने इसे हमेशा के लिए खारे पानी में बदल दिया।
जब समुद्र के सौंदर्य पर लगा ग्रहण
पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग के समय में समुद्र देव का जल अत्यंत पवित्र, मीठा और पीने योग्य था। समुद्र देव को अपनी सुंदरता और अपने जल की शुद्धता पर बहुत गर्व था। उसी समय, माता पार्वती अपनी तपस्या और साधना में लीन रहती थीं।
एक बार भगवान शिव की अनुपस्थिति में माता पार्वती स्नान की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने अपनी मर्यादा और एकांत की रक्षा के लिए कुछ विशेष प्रबंध किए थे। लेकिन समुद्र देव, माता पार्वती के दिव्य रूप और उनके तेज से इतने सम्मोहित हो गए कि उन्होंने मर्यादा की सीमाओं को लांघने का प्रयास किया।
माता पार्वती का क्रोध और श्राप
समुद्र देव की चंचलता और उनकी कुदृष्टि ने माता पार्वती को अत्यंत क्रोधित कर दिया। माता पार्वती शक्ति का स्वरूप हैं और उन्होंने इसे स्त्री की मर्यादा का अपमान माना। उन्होंने अनुभव किया कि जिस मधुर जल पर समुद्र देव को इतना अहंकार है, वही उनके अहंकार का कारण बन रहा है।
क्रोध में आकर माता पार्वती ने समुद्र देव को श्राप दिया- “जिस मधुर जल पर तुम्हें इतना अभिमान है और जिसकी वजह से तुम अपनी मर्यादा भूल गए हो, वह जल अब किसी के पीने योग्य नहीं रहेगा। आज से तुम्हारा समस्त जल खारा (नमकीन) हो जाएगा।”
श्राप का प्रभाव और आज का सच
माता पार्वती के श्राप देते ही समुद्र का मीठा जल तुरंत खारा हो गया। समुद्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने माता से क्षमा मांगी, लेकिन श्राप वापस नहीं लिया जा सकता था। तब से लेकर आज तक, दुनिया भर के समुद्रों का पानी खारा है। यही कारण है कि प्यास से व्याकुल होने के बावजूद कोई भी इंसान समुद्र का पानी नहीं पी सकता।
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