महिला आरक्षण विधेयक पर अपना रुख तय करेगा विपक्ष, 15 अप्रैल को होगी बैठक

महिला आरक्षण कानून पर सरकार के प्रस्ताविक संशोधनों पर एक साझा रुख तय करने के लिए 15 अप्रैल को विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई गई है। इसके साथ ही, कांग्रेस कार्यसमिति ने शुक्रवार को 16-18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए एक संयुक्त रणनीति पर भी फैसला किया।

समिति ने 2026 की जनगणना और परिसीमन को आरक्षण के इस उपाय से अलग करने के कदम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। साथ ही, उसने बीजेपी पर जाति जनगणना को नाकाम करने की कोशिश करने और चुनाव प्रचार के दौरान संसद का संत्र रखकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। ऐसी उम्मीद है कि विपक्ष सरकार के प्रस्ताव में संशोधन पेश कर सकता है।

कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की
CWC ने विशेष सत्र से एक हफ्ता पहले विपक्ष के साथ प्रस्तावित संशोधन साझा न करने के लिए सरकार की विशेष आलेचना की। मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार राजनीति कर रही है। कहा जाता है कि सचिन पायलट ने यह तर्क दिया ‘परिसीमन’ को 2026 की जनगणना पर आधारित करने से ओबीसी महिलाओं के लिए एक उप-कोटा बनाने में मदद मिलेगी।

मनीष तिवारी और मुकुल वासनिक ने कथित तौर पर यह तर्क दिया कि सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या तय नहीं कर सकती और फिर परिसीमन की मांग नहीं कर सकती।

कांग्रेस ने महिला आरक्षण का किया समर्थन
कुछ सदस्यों ने तर्क दिया कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन ‘जनगणना-परिसीमन-SC/ST/महिलाओं के लिए के लिए कोटा’ की संवैधानिक प्रक्रिया के क्रम का पालन किया जाना चाहिए। जानकारी के अनुसार, सोनिया गांधी ने आगाह किया कि पार्टी को इस प्रस्ताव का विरोध करने हुए नहीं दिखना चाहिए।

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