महिलाओं में मौत की बड़ी वजह है सर्वाइकल कैंसर

सेहत और बीमारियों को लेकर लोगों के बीच काफी जागरुकता आई है, लेकिन ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन को लेकर आज भी लोगों के मन में हिचकिचाहट है। यह सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी देखने को मिलता है।

यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव में असरदार है, जो भारतीय महिलाओं में आज भी मौत का प्रमुख कारण है। फिर भी HPV वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में इतना संकोच क्यों है? आइए जानें इसके पीछे के कारण।

जागरूकता की कमी और गलतफहमियां
HPV वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट की सबसे बड़ी वजह जानकारी की कमी है। शिक्षित आबादी के बीच भी HPV के बारे में जानकारी काफी सीमित है। सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरें और सुरक्षा को लेकर डर इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। अक्सर लोग इसके साइड इफेक्ट्स और फर्टिलिटी पर पड़ने वाले असर को लेकर डरे रहते हैं, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।

सामाजिक संकोच
HPV एक सेक्शुअली ट्रांस्मिटेड इन्फेक्शन (STI) है, इसलिए टीनएजर्स के वैक्सीनेशन पर बात करते समय माता-पिता अक्सर असहज महसूस करते हैं। सेक्शुअल हेल्थ पर खुलकर चर्चा न होने के कारण लोग जानकारी लेने के बजाय इस विषय से बचना बेहतर समझते हैं। साथ ही, कई लोग खुद को इस बीमारी के जोखिम से बाहर मानते हैं।

लागत और डॉक्टरों की भूमिका
शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तो हैं, लेकिन HPV वैक्सीन की कीमत इसे कई लोगों की पहुंच से दूर या महंगा बना देती है। इसके अलावा, कई बार डॉक्टर भी समय की कमी या मरीज की प्रतिक्रिया के डर से खुद आगे बढ़कर इस वैक्सीन की सलाह नहीं देते।

HPV वैक्सीन के मिथक और उनके पीछे का सच
मिथक- यह वैक्सीन नई है और इसके लंबे समय के प्रभावों का पता नहीं है।
सच- यह वैक्सीन नई नहीं है, बल्कि सालों से इस्तेमाल हो रही है। हां, लोगों को इसके बारे में जानकारी अब मिलने लगी है। WHO और CDC जैसी संस्थाओं ने इसकी सुरक्षा की पुष्टि की है।

मिथक- इससे ओवेरियन फेलियर या ऑटोइम्यून बीमारियां होती हैं।
सच- 10 लाख महिलाओं के अध्ययन में ओवेरियन फेलियर का कोई संबंध नहीं पाया गया। टीका लगवा चुके और न लगवाने वाले लोगों में बीमारियों या मृत्यु की दर समान है।

मिथक- बच्चे सेक्शुअली एक्टिव नहीं हैं, तो वैक्सीनेशन की क्या जरूरत?
सच- कम उम्र यानी 15 साल से पहले में वैक्सीनेशन से बेहतर इम्यून रिस्पॉन्स मिलता है और कम खुराकों की जरूरत होती है।

मिथक- पुरुषों को इसकी जरूरत नहीं है।
सच- HPV केवल सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि पुरुषों में होने वाले एनल, पेनाइल और ऑरोफरीन्जियल कैंसर के लिए भी जिम्मेदार है। जेंडर-न्यूट्रल वैक्सीनेशन सभी के लिए सुरक्षा देता है।

HPV वैक्सीन 9 से 45 वर्ष की आयु के बीच दी जा सकती है। 11 से 12 वर्ष के बच्चों को दो खुराकें दी जाती है और 26 साल तक के युवा जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है, वे कैच-अप वैक्सीनेशन करवा सकते हैं। 27 से 45 वर्ष के वयस्कों को अपने डॉक्टर की सलाह लेकर यह तय करना चाहिए कि क्या यह उनके लिए सही है।

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