महिलाओं में अल्जाइमर का खतरा पुरुषों से ज्यादा क्यों है? जानें

क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों में से दो-तिहाई महिलाएं हैं? जी हां, यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, लेकिन साथ ही जागरूक करने वाला भी। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में भूलने की बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है। 

इसलिए जरूरी है कि 40 की उम्र के बाद हर महिला अपने दिमाग की सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहे। अब सवाल आता है कि महिलाओं में इस बीमारी का खतरा ज्यादा क्यों होता है, तो इसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं। आइए जानें इन्हीं वजहों के बारे में और कैसे आप अपने दिमाग का ख्याल रख सकती हैं। 

क्यों ज्यादा महिलाओं होती हैं अल्जाइमर का शिकार?

अल्जाइमर आमतौर पर बढ़ती उम्र की एक बीमारी है, जो उम्र बढ़ने के साथ अपने लक्षण दिखाना शुरू करता है। इसलिए इस सवाल का एक जबाव हो सकता है कि क्योंकि महिलाएं पुरुषों से ज्यादा जीती हैं, इसलिए वे अल्जाइमर का शिकार भी ज्यादा होती हैं। 

हालांकि, इस सवाल का सही जवाब इतना सिंपल नहीं है। इसके लिए आपको महिलाओं की बायोलॉजी को समझना होगा।

एस्ट्रोजन हार्मोन है दिमाग का सुरक्षा कवच
फीमेल रिप्रोडक्टिव हार्मोन एस्ट्रोजन, जो मेनोपॉज से पहले तक महिलाओं के शरीर में ज्यादा मात्रा में पाया जाता है दिमाग के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह हार्मोन दिमाग के सेल्स को डैमेज होने से बचात है, लेकिन मेनोपॉज के बाद शरीर में यह हार्मोन काफी तेजी से कम होता है।

एस्ट्रोजन कम होने की वजह से अभी तक हम सिर्फ नींद, मूड और दिल के बारे में बात करते आए हैं, लेकिन इसका असर हमारे दिमाग की सेहत पर भी पड़ता है। एस्ट्रोजन कम होने की वजह से दिमाग की खुद की रक्षा करने की क्षमता कम होने लगती है। इसलिए मेनोपॉज के बाद महिलाओं में अल्जाइमर का रिस्क बढ़ने लगता है।

जेनेटिक्स भी है बड़ा खतरा
एक खास जीन को अल्जाइमर से जोड़कर देखा जाता है। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि जिन लोगों में APOE जीन पाया जाता है, उनमें अल्जाइमर का रिस्क ज्यादा होता है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं में यह जीन वेरिएंट पाया जाता है, उनमें इस बीमारी की खतरा, उसी जीन वाले पुरुष की तुलना में काफी ज्यादा होता है।

कब होती है खतरे की शुरुआत?
अल्जाइमर दिमाग में हानिकारक प्रोटीन जमा होने की वजह से होता है। मेनोपॉज के दौरान दिमाग की ग्लूकोज इस्तेमाल करने की क्षमता कम होने लगती है। इस वजह से एनर्जी सप्लाई घट जाता है और दिमाग अल्जाइमर का कारण बनने वाले हानिकारक प्रोटीन को बाहर नहीं निकाल पाता। शुरुआत में इसका पता नहीं चलता, लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ने लगती है और अल्जाइमर का रूप ले लेती है।

बचाव के लिए क्या कर सकते हैं?
जेनेटिक्स और शरीर के नेचुरल मेनोपॉज के प्रोसेस को नहीं बदला जा सकता, लेकिन अपने दिमाग की सेहत का ख्याल जरूर रखा जा सकता है। एक स्टडी में भी साबित हो चुका है कि लाइफस्टाइल में बदलाव करके अल्जाइमर के खतरे को कम किया जा सकता है।

दिमाग को एक्टिव रखने के लिए कोई नई हॉबी अपनाएं या कोई नया स्किल सीखें। इसके साथ-साथ अपनी नींद, डाइट, एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटीज का भी पूरा ध्यान रखें। रोजाना 8 घंटे की नींद जरूर लें। नींद से किसी भी तरह का कॉम्प्रोमाइज दिमाग की सेहत को सीधा नुकसान पहुंचाता है।

इसी तरह एक्सरसाइज न करना या फिजिकली एक्टिव न रहने से भी दिमाग पर असर होता है। इसलिए रोज आधे घंटे एक्सरसाइज करें और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। इन बातों के साथ-साथ स्ट्रेस मैनेजमेंट पर भी ध्यान देना काफी जरूरी है और स्मोकिंग और शराब पीने जैसी आदतों से भी परहेज करें।

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