सनातन धर्म में भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है क्योंकि वे एक लोटा जल और कुछ पत्तों से ही प्रसन्न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर जहां बेलपत्र का महत्व जगजाहिर है। वहीं, शमी पत्र का अर्पण भी विशेष फलदायी माना गया है।
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं, तो महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर 108 शमी पत्र अर्पित करना चमत्कारिक साबित हो सकता है। मान्यता है कि शमी पत्र अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करने से घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और आय के नए स्रोत खुलते हैं।
विवाह में आ रही बाधाओं का समाधान
जिन युवक-युवतियों के विवाह में देरी हो रही है या बार-बार बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि का दिन वरदान की तरह है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाकर शमी पत्र अर्पित करने से मंगल और शनि के दोष शांत होते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि अगर कुंवारी कन्याएं माता पार्वती और भगवान शिव का गठबंधन कर शमी पत्र अर्पित करें, तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।
करियर और व्यापार में सफलता
अंक ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, करियर में तरक्की और व्यापार में मुनाफे के लिए महाशिवरात्रि पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके महादेव को शमी पत्र चढ़ाएं। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाता है और कार्यक्षेत्र में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है।
शनि दोष से मुक्ति
भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोगों को महाशिवरात्रि पर शमी पत्र के साथ काले तिल शिवलिंग पर चढ़ाने चाहिए। इससे शनि का कुप्रभाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
शमी पत्र अर्पित करने के मुख्य नियम:
शमी पत्र को अर्पित करने से पहले उन्हें साफ जल या गंगाजल से धो लें।
अपनी मनोकामना के अनुसार 11, 21, 51 या 108 की संख्या में पत्र चढ़ाएं।
हमेशा शिवलिंग के बाईं ओर या जलाधारी के पास शमी पत्र रखें।
ध्यान रहे कि पत्ते कहीं से कटे-फटे या सूखे न हों।
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