महाराष्ट्र बजट सत्र: राज्यपाल ने निवेश, रोजगार और विकास पर दिया जोर

महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए बुनियादी ढांचे के विकास और किसानों के कल्याण को अपनी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बताया है।

सोमवार को अपने अभिभाषण में राज्यपाल ने हाल ही में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच में महाराष्ट्र की सफलता का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने विभिन्न देशों की कंपनियों के साथ लगभग 30 लाख करोड़ रुपए के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन परियोजनाओं से राज्य में करीब 40 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

राज्यपाल ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि महाराष्ट्र देश की जीडीपी में 13.5 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में देश का अग्रणी राज्य बना हुआ है। राज्य के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने के लिए राज्यपाल ने ‘समृद्धि महामार्ग’ के विस्तार की घोषणा की।

अब इस महामार्ग को पालघर के वाधवन पोर्ट और पूर्वी विदर्भ तक जोड़ा जाएगा। इसके अलावा उन्होंने माओवाद प्रभावित रहे गढ़चिरौली जिले को एक बड़े ‘स्टील हब’ के रूप में विकसित करने और पूर्वी विदर्भ में ‘स्टील कॉरिडोर’ बनाने की योजना पेश की ।

राज्यपाल के अभिभाषण में मुंबई की यातायात समस्याओं को सुलझाने के लिए बीकेसी-कुर्ला, बोरीवली-ठाणे और मुलुंड सुरंग परियोजनाओं पर भी काम तेज करने की बात कही गई। कृषि क्षेत्र के लिए राज्यपाल ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि किसानों को अब सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

साथ ही, फसल नियोजन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जाएगा। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

आज सत्र की शुरुआत भारी मन के साथ हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजीत पवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका हाल ही में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। राज्यपाल ने भी उनके योगदान को याद किया।
उनके निधन के बाद अब वित्त विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री फडणवीस संभाल रहे हैं, जो छह मार्च को राज्य का बजट पेश करेंगे।

राज्यपाल ने कर्नाटक के साथ चल रहे सीमा विवाद को कानूनी रूप से सुलझाने और सीमावर्ती क्षेत्रों के मराठी भाषियों के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने 2026 से 2030 के लिए नई औद्योगिक और सेवा नीति की घोषणा भी की।

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