भारत में सुपर एल-नीनो बढ़ाएगा मुश्किल, भयंकर गर्मी के साथ सूखे और बाढ़ का अलर्ट

देश के अधिकांश हिस्सों में पारा 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। आने वाले दिनों में इस भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं।

दरअसल, वैज्ञानिकों की मानें तो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली ‘सुपर एल-नीनो’ आकार ले रहा है, जो 1877 के बाद की सबसे विनाशकारी मौसम संबंधी घटना साबित हो सकता है। इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि एल-नीनो भारत की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून को भी प्रभावित करने वाला है।

तेजी से बढ़ रहा तापमान

देश इन दिनों भीषण गर्मी से जूझ रहा है। बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, अहमदाबाद और नागपुर जैसे शहरों में पारा 41 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, और उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार दूसरे दिन तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। यही नहीं महाराष्ट्र के विदर्भ जैसे दक्षिणी इलाकों में भी भीषण गर्मी पड़ रही है।

1877 की घटना से भी भयंकर हो सकते हैं हालात

मौसम विशेषज्ञ इसे प्रशांत महासागर में बन रहे ‘सुपर एल-नीनो’ से जोड़ रहे हैं। अल नीनो का संबंध दक्षिण-पश्चिम मानसून से है, जिसके कारण मानसून पर निश्चित रूप से संकट बढे़गा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह मौसम संबंधी घटना 1877 की घटना से भी बदतर हो सकती है, जिसके कारण उस समय वैश्विक आबादी के लगभग चार प्रतिशत तक लोगों की व्यापक मृत्यु हुई थी। यानी यह अल नीनो लगभग 150 साल पुराने रिकार्ड को तोड़ सकता है।

क्यों बढ़ रहा तापमान?

भारत के एक बड़े हिस्से में भीषण गर्मी का खतरा बना हुआ है, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने देश के कई हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है। इस बीच तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस जानलेवा गर्मी के पीछे वैश्विक कारकों के साथ-साथ कई स्थानीय कारण भी जिम्मेदार हैं-

1. लंबे समय से सूखा मौसम और आसमान में बादलों की कमी के कारण धूप सीधे और तीखी पड़ रही है।

2. शहरों में कंक्रीट का जाल, घनी आबादी, वाहनों का धुआं, एयर कंडीशनर (AC) से निकलने वाली गर्मी और फैक्ट्रियों के कारण शहर कंक्रीट के तपते हुए द्वीप बन चुके हैं, जहाँ ग्रामीण इलाकों की तुलना में तापमान कई गुना ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।

क्या है एल-नीनो और इसके इफेक्ट से क्यों पड़ती है गर्मी?

एल-नीनो एक मौसम संबंधी प्राकृतिक जलवायु घटना है, यह घटना पूर्वी प्रशांत सागर में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक होने पर बनती है। एल-नीनो के असर से पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस गर्मी से वैश्विक पवन पैटर्न कमजोर या परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है जो दुनिया भर की मौसम प्रणालियों को बाधित करती है।

पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म होने के साथ पूर्व की ओर बढ़ने लगता है, जिससे भारत के मौसम पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में भयानक गर्मी का सामना करना पड़ता है और सूखे के हालात बनने लगते हैं।

यह घटना आमतौर पर हर दो से सात साल में घटित होती है और एक साल तक चल सकती है। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, मई और जुलाई 2026 के बीच एल-नीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है, और दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की 96 प्रतिशत संभावना है।

क्या होता है सुपर एल-नीनो

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सुपर एल-नीनो तब होता है जब समुद्र की सतह के तापमान का तीन महीने का औसत दीर्घकालिक औसत की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, इस बार समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि तीन डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकती है, यह 1877 में दर्ज किए गए वर्तमान ज्ञात उच्चतम स्तर 2.7 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगी। जिसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी जैसी स्थिति देखने को मिलेगा।

हो सकता है भारी नुकसान

1982-83 के अल नीनो के कारण वैश्विक आय में लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, जबकि 1997-98 के “सदी के एल-नीनो” के कारण वैश्विक स्तर पर अनुमानित 5.7 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ था। ऐसे में विशेषज्ञ एल-नीनो के असर से भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जता रहे हैं।

भारत पर एल-नीनो का असर

बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत प्रदान करता है। एल-नीनो अगर मजबूत होता है तो यह सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून को ही प्रभावित करेगा। जिससे वर्षा और देश में होने वाली कुल वर्षा में कमी आएगी। भारत के मौसम विभाग ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी है कि इस मौसम में भारत में केवल लगभग 800 मिमी बारिश हो सकती है। इससे खरीफ मौसम के लिए मानसून की बारिश पर निर्भर रहने वाले देश के लगभग 60 प्रतिशत किसानों के लिए भारी संकट उत्पन्न हो सकता है।


IMD के अनुसार, एल-नीनो के कारण भारत के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का सबसे अधिक खतरा रहेगा, जबकि चेन्नई जैसे स्थानों पर भारी बारिश होगी जिससे व्यापक बाढ़ और तबाही हो सकती है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com