आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से शनिवार को भारत के अंतरिक्ष इतिहास का एक नया अध्याय लिखा गया। हैदराबाद के एक स्टार्टअप ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा बनाए गए ‘विक्रम-1’ रॉकेट ने अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इसके साथ ही यह भारत का पहला ऐसा प्राइवेट रॉकेट बन गया है, जिसने पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में कदम रखा है।
35 मिनट का वो तनाव, फिर मिली ऐतिहासिक कामयाबी
बता दें कि शनिवार दोपहर को लॉन्चिंग से ठीक 5 मिनट पहले एक तकनीकी रुकावट आ गई, जिससे वहां मौजूद वैज्ञानिकों और टीम की सांसें थम गईं। करीब 35 मिनट की देरी और तनाव के बाद, लॉन्चिंग की प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया गया। दोपहर ठीक 12:05 बजे ‘विक्रम-1’ ने पहले लॉन्चपैड से गरजते हुए आसमान की तरफ उड़ान भरी। स्काईरूट के इस पहले मिशन को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया था।
मिशन में क्या हासिल हुआ?
गौर करने वाली बात यह है कि इस रॉकेट ने अपने साथ ले गए 6 सैटेलाइट्स को पृथ्वी से 450 किलोमीटर ऊपर उनकी तय जगह पर बिल्कुल सही तरीके से पहुंचा दिया।
पहली बार में ही बड़ी सफलता
इसके अलावा स्काईरूट दुनिया की उन बेहद चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है, जिसने अपने पहले ही प्रयास में ऑर्बिटल लॉन्चिंग (कक्षा में पहुंचने) में सफलता पाई है।
भारत के लिए यह इतनी बड़ी बात क्यों है?
यह सफलता भारत के लिए कई मायनों में बेहद खास और ऐतिहासिक है। इस सफलता के साथ ही अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जहां किसी प्राइवेट कंपनी ने अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचने वाला रॉकेट लॉन्च करने की क्षमता हासिल की है।
इतिहास खुद को कैसे दोहरा रहा है?
याद दिला दें कि आज से ठीक 46 साल पहले यानी 18 जुलाई 1980 को भारत की सरकारी स्पेस एजेंसी इसरो ने अपने ‘SLV-3’ रॉकेट से पहली बार देश का सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा था। दिलचस्प बात यह है कि प्राइवेट कंपनी का यह ‘विक्रम-1’ रॉकेट भी इसरो के उस पुराने रॉकेट की तरह ही 22 मीटर ऊंचा है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अब तक भारत में रॉकेट बनाने और लॉन्च करने का काम सिर्फ सरकारी संस्था इसरो करती थी। लेकिन इस लॉन्चिंग के बाद अब भारत में प्राइवेट कंपनियां भी खुद के रॉकेट डिजाइन करने और उन्हें अंतरिक्ष में भेजने के दौर में शामिल हो गई हैं।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal