भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां साझा करते हुए इसे आत्मनिर्भरता की जीत बताया।
भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले साल के 1.54 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 15.6 प्रतिशत अधिक है।
पीएम ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के विजन, नई तकनीक और स्वदेशी निर्माण ने भारत को मजबूती दी है। प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों के सफर का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे भारत ने जल, थल और नभ में अपनी ताकत बढ़ाई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत नींव करार दिया।
आंकड़ों में क्या?
आंकड़ों पर नजर डालें तो रक्षा उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल आया है। साल 2020-21 में यह आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था, जिसमें अब तक 110 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, साल 2013-14 की तुलना में रक्षा उत्पादन अब लगभग चार गुना बढ़ गया है। उस समय यह केवल 43,746 करोड़ रुपये था।
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बड़ी सफलता के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह विकास देश के मजबूत होते रक्षा औद्योगिक आधार का प्रमाण है। उन्होंने सरकारी विभाग के साथ-साथ निजी क्षेत्र की मेहनत को भी सराहा। रक्षा मंत्री को भरोसा है कि सरकार की नीतियों और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से आने वाले समय में यह रफ्तार और तेज होगी।
इस रिकॉर्ड उत्पादन में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 24 प्रतिशत का योगदान दिया। निजी कंपनियों ने करीब 42,000 करोड़ रुपये का उत्पादन किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। रक्षा उत्पादन बढ़ने का फायदा निर्यात में भी दिखा है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात किया है। रक्षा मंत्रालय ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की एक बड़ी कामयाबी बताया है।
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