बैंक या वित्तीय संस्थानों को जमीन का भौतिक कब्जा लेने का है अधिकार: इलाहाबाद HC

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बैंक व वित्तीय संस्थानों को जमीन पर भौतिक कब्जा देने के सरफेसी एक्ट की धारा 14 का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रदेश के मुख्य सचिव से कहा है कि संबंधित सभी प्राधिकारियों को दो हफ्ते में सर्कुलर जारी करें कि यदि वैधानिक अड़चन न हो तो बैंक या वित्तीय संस्थानों को जमीन का कब्जा सौंप दिया जाए।

कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के डीएम को निर्देश दिया : कोर्ट ने जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर व अन्य अधिकारियों एक माह में बैंक को जमीन का कब्जा सौंपने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी की याचिका पर दिया है।

कोर्ट ने कहा- यह अधिकारियों की विफलता है : राज्य सरकार के अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाह ने बताया कि 14 फरवरी 22 को शासनादेश जारी किया गया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की विफलता है। वे धारा 14 के दायित्व को पूरा नहीं कर रहे हैं। धारा 14 के अनुसार बैंक, वित्तीय संस्थानों एवं रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को जमीन पर कब्जा लेने का अधिकार देती है और जिलाधिकारी का दायित्व है कि पुलिस सहायता से कब्जा सौंपे।

कोर्ट ने कहा कि डीएम या मेटा्रपोलिटन मजिस्‍ट्रेट शक्तिहीन नहीं हैं : कोर्ट ने कहा कि कानून का उद्देश्य लोन की त्वरित वसूली करना है। बैंक को संपत्ति बेचने या बंधक रखने का अधिकार है। कानून अर्जी से 30 दिन में कब्जा दिलाने का आदेश देता है। अधिकतम 60 दिन में कब्जा सौंपने की जवाबदेही तय है। कोर्ट ने कहा जिलाधिकारी या मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट शक्तिहीन नहीं है। कब्जा दिलाने की हर कार्रवाई कर सकते हैं।

मुख्‍य सचिव को निर्देश : याची सिक्योर क्रेडीटर है। जमीन पर कब्जा न मिल पाने के कारण वह कार्य नहीं कर पा रहा है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को सभी अधिकारियों को सरफेसी एक्ट का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।

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