बंगाल के उत्तर 24 परगना के बणिक मोड़ पर शुक्रवार शाम माकपा के छात्र संगठन एसएफआई की सभा को लेकर विवाद के बाद हंगामा हो गया। सभा स्थल पर तोड़फोड़ की गई और मंच व कुर्सियां तोड़े जाने के साथ फ्लेक्स फाड़ने का आरोप है।
एसएफआई ने घटना के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा ने आरोप से इनकार करते हुए इसे स्थानीय लोगों का विरोध बताया है।
एसएफआई के अनुसार, सभा के लिए पुलिस की अनुमति ली गई थी। सुबह से मंच और माइक लगाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन माइक लगाने वालों को काम बंद करने की धमकी दी गई। शाम को सभा शुरू होने से पहले कुछ लोगों ने माइक और कुर्सियां हटाने को कहा।
इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि इसके बाद मंच और कुर्सियों में तोड़फोड़ की गई तथा मंच के पीछे लगे फ्लेक्स को फाड़ दिया गया।
महात्मा गांधी का चित्र भी फाड़े जाने का आरोप
गांधी जयंती के मौके पर लगाया गया महात्मा गांधी का बड़ा चित्र भी फाड़े जाने का आरोप है। हंगामे में कुछ एसएफआइ समर्थकों के घायल होने की भी बात सामने आई है। सूचना मिलने पर निमता थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति नियंत्रित की।
एसएफआई ने मौके पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों को नहीं रोकने का आरोप लगाया है। भाजपा ने आरोप नकारे, स्थानीय लोगों के विरोध का दावा घटना को लेकर माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती और एसएफआई नेता दीप्सिता धर भी मौके पर पहुंचे।
दीप्सिता ने कहा कि तोड़फोड़ के बावजूद उसी स्थान पर सभा की जाएगी। वहीं, उत्तर दमदम के भाजपा विधायक सौरभ सिकदार ने भाजपा की संलिप्तता से इनकार किया। दावा किया कि स्थानीय लोगों ने सभा का विरोध किया था और सभा में आपत्तिजनक व देशविरोधी नारे लगाए जाने से लोग नाराज थे।
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