बंगाल की प्रसिद्ध हिलसा मछली अब गुजरात में तलाश रही अपना घर

पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध हिलसा मछली अब गुजरात के पानी में नया घर तलाश रही है। बदलते मानसूनी करंट और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण नर्मदा नदी में हिलसा की पकड़ में जबरदस्त उछाल आया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर पानी समुद्र में बहता है। इसके अलावा भरूच के पास नर्मदा के निचले हिस्से में मीठे और खारे पानी का आदर्श मिश्रण हिलसा के प्रजनन के लिए उपयुक्त माहौल बना रहा है।

कामधेनु विश्वविद्यालय, गांधीनगर के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर आरबी वाला और एएम परमार ने बताया कि हिलसा एक एनाड्रोमस प्रवासी मछली है। यह अपना ज्यादातर जीवन समुद्र में बिताती है, लेकिन प्रजनन के लिए नदियों के मीठे पानी की ओर पलायन करती है।

उन्होंने कहा कि पहले बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की गंगा-हुगली नदी प्रणाली हिलसा के प्रमुख प्रजनन क्षेत्र थे। लेकिन फरक्का बैराज, नदियों पर बढ़ते निर्माण, नदी की गहराई में बदलाव, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने पारंपरिक प्रवास और प्रजनन क्षेत्रों को प्रभावित किया है।

गुजरात में 2025-26 में हिलसा का कुल उत्पादन 14,587.72 मीट्रिक टन पहुंच गया, जो चार साल का रिकॉर्ड है। गुजरात मत्स्य उद्योग आयुक्त विजय खराड़ी के अनुसार, 2022-23 में 14,198.98 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। इसके बाद 2023-24 में यह घटकर 8,209.48 और 2024-25 में 8,535.75 मीट्रिक टन रह गया था।

2025-26 में अंतर्देशीय हिलसा उत्पादन में भारी वृद्धि हुई। 2024-25 में महज 123.62 मीट्रिक टन से बढ़कर यह 4,645.99 मीट्रिक टन हो गया। भरूच जिले में अकेले 7,410.09 मीट्रिक टन हिलसा पकड़ी गई, जिसमें 2,949.76 मीट्रिक टन समुद्री और 4,460.33 मीट्रिक टन अंतर्देशीय शामिल है। जिले का हिस्सा राज्य के कुल उत्पादन का करीब 51 प्रतिशत रहा।

यह उछाल 25,000 से ज्यादा मछुआरों के लिए रोजगार का बड़ा सहारा बना है। भड़भूत गांव के मछुआरे धवल माछी ने बताया कि नर्मदा किनारे के गांवों के मछुआरे मानसून के चार महीने के हिलसा सीजन पर निर्भर रहते हैं। हंसोत, दहेज और भड़भूत क्षेत्रों से अच्छी पकड़ की खबर है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com