पारण के बिना अधूरा है षटतिला एकादशी व्रत, अभी नोट करें शुभ मुहूर्त और विधि

वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी व्रत किया जाएगा। इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी उत्साह के साथ मनाया जाएगा। एकादशी तिथि को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और व्रत का पारण करने से श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण जरूर करना चाहिए। साथ ही मंदिर या गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान करें। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि षटतिला एकादशी व्रत की पारण विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में।

षटतिला एकादशी 2026 डेट और टाइम
वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी मनाई जाएगी।
माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट पर
माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा

षटतिला एकादशी 2026 व्रत पारण का टाइम

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ही करना चाहिए। षटतिला एकादशी व्रत का पारण करने का समय 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।

षटतिला एकादशी व्रत पारण विधि
इस दिन सुबह स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
घर और मंदिर की सफाई करें।
देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें।
श्रीहरि के मंत्रों और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
सात्विक चीजों का भोग लगाएं।
भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
इसके बाद लोगों में प्रसाद वितरण करें और स्वयं भी ग्रहण करें।

इन चीजों का करें दान
षटतिला एकादशी के दिन मकर संक्रांति है, तो ऐसे में तिल का दान जरूर करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार,
तिल का दान करने से साधक को भगवान विष्णु और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा धन और कपड़े समेत आदि चीजों का दान करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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