पहाड़ों से ज्यादा मैदानी क्षेत्रों में बरस रहे बादल, मौसम वैज्ञानिक का शोध पत्र प्रकाशित

उत्तराखंड में जुलाई और अगस्त भारी बारिश के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण हैं। जुलाई में राज्य को औसतन 417.8 मिलीमीटर और अगस्त में 385.7 मिलीमीटर बारिश होती है।

उत्तराखंड के मौसम में चौंकाने वाले बदलाव सामने आ रहे हैं। 41 वर्षों के अध्ययन के आधार पर मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह और मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अब मानसून के दौरान पहाड़ से ज्यादा मैदानों में बादल बरस रहे हैं। उनका यह शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

उन्होंने 1983 से 2023 तक के 41 वर्षों के मानसूनी बारिश के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। अध्ययन में देहरादून और पंतनगर को मैदानी क्षेत्र, मुक्तेश्वर और टिहरी को पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधि माना गया। मानसून के दौरान भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश वाले दिनों की औसत संख्या देहरादून में 7.1 दिन रही। इसके बाद पंतनगर में 4.2 दिन, मुक्तेश्वर में 2.3 दिन और टिहरी में सिर्फ 1.7 दिन ऐसे दिन रहे। यानी अध्ययन में शामिल चार केंद्रों में मैदानी क्षेत्र के दोनों स्टेशन देहरादून और पंतनगर पहाड़ी क्षेत्र के टिहरी और मुक्तेश्वर से आगे रहे।

जुलाई-अगस्त में बरसते हैं सबसे ज्यादा बादल
अध्ययन के मुताबिक उत्तराखंड में जुलाई और अगस्त भारी बारिश के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण हैं। जुलाई में राज्य को औसतन 417.8 मिलीमीटर और अगस्त में 385.7 मिलीमीटर बारिश होती है। इन दोनों महीनों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या अधिक रहती है। इसकी साल-दर-साल परिवर्तनशीलता जून और सितंबर की तुलना में कम है।

दून में कुल बारिश का 37 फीसदी हिस्सा भारी बारिश से
अध्ययन में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश को मिलाकर चरम बारिश के रूप में देखा गया। मानसून की कुल बारिश में इस श्रेणी का औसत योगदान देहरादून में 37 फीसदी है। पंतनगर में यह 33 फीसदी, मुक्तेश्वर में 24 फीसदी और टिहरी में 19 फीसदी है। इससे साफ होता है कि अध्ययन में शामिल पहाड़ी केंद्रों की तुलना में मैदानी केंद्रों पर मानसूनी बारिश का बड़ा हिस्सा भारी या उससे अधिक बारिश के रूप में दर्ज हुआ।

79 फीसदी बारिश मानसून में
उत्तराखंड में सालभर होने वाली कुल बारिश 1477.6 मिमी का करीब 79 फीसदी यानी 1162.7 मिमी हिस्सा जून से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मिलता है। इसी वजह से मानसून की बारिश में होने वाले बदलाव राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारी बारिश उत्तराखंड में बाढ़, भूस्खलन और अन्य जल एवं भू-वैज्ञानिक आपदाओं का प्रमुख कारण बनती है।

हल्की बारिश के दिन बढ़े
शोध पत्र में बताया गया है कि मानकों के तहत 24 घंटे की बारिश को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। अध्ययन के मुताबिक, तीन स्टेशनों (देहरादून, मुक्तेश्वर और पंतनगर) पर बहुत हल्की बारिश के दिनों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, तीन स्टेशनों (देहरादून, मुक्तेश्वर और टिहरी) पर सूखे दिनों में गैर-महत्वपूर्ण कमी आई है। इसके अलावा बारिश की अन्य श्रेणियों में कोई विशेष बदलाव नहीं देखा गया है।

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