पंजाब विधानसभा का सत्र शुरू हो गया है। सबसे पहले विधानसभा में गायिका आशा भोंसले को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही वृंदावन में हुए नाव हादसे में मारे गए लोगों को भी सदन की तरफ से श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखा गया।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने कहा कि जीरो ऑवर होना चाहिए। यह विधायकों का हक है। प्रदेश में कानून व्यवस्था और ड्रग का मुद्दा है, उस पर चर्चा नहीं करते हैं। एक दो दिन के लिए सत्र बढ़ाया जाना चाहिए। इस पर सीएम मान ने कहा कि जब हम सत्र बुलाते हैं तो आप वॉकआउट कर जाते हैं और वैसे सत्र की बढ़ाने की मांग करते हैं। आज का सत्र सिर्फ बेअदबी के खिलाफ बिल को लेकर ही समर्पित होना चाहिए।
बिल पर चर्चा शुरू
बिल पर चर्चा शुरू हुई। कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि पहली भी सरकारों को मौका मिला है लेकिन आज तक उन्होंने इसके प्रयास नहीं किए, बल्कि वे खुद बेअदबी के आरोपी हैं। श्री अकाल तख्त के समक्ष उन्होंने अपनी गलती मानी है। बैंस ने कहा कि गजटेड ऑफिसर से नीचे का कोई अधिकारी इस मामले में जांच नहीं करेगा। इसमें उम्र कैद का प्रावधान है और साथ ही 25 लाख जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। इसमें किसी भी तरह के समझौते का प्रावधान नहीं है।
विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर ने कहा कि काफी समय से इस बिल की मांग थी। पहले अपराधी छूट जाते थे, क्योंकि सख्त सजा का प्रावधान नहीं था। अब अपराधी छूट नहीं पाएंगे। इस बिल को मेरा समर्थन है।
नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने कहा कि बिल पर सांविधानिक विशेषज्ञों की राय ली गई है या नहीं, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सेलेक्ट कमेटी में जो एसजीपीसी के अलावा अन्य संगठनों ने जो सुझाव दिए। वो भी बताए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आप प्रमुख केजरीवाल ने वादा किया था कि सभी आरोपियों को कटघरे में खड़े करेंगे। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। विधायक कुंवर विजय प्रताप के जरिय करवाई तेज करने की बात कही थी लेकिन आज वो खुद ही पार्टी से बाहर है।
सीएम भगवंत मान ने कहा कि यह आज करने वाली बात नहीं है। आपका पूर्व सीएम आज दूसरी पार्टी में नहीं है। आपका प्रधान आज दूसरी पार्टी में है। आपका पूर्व वित्त मंत्री आज दूसरी पार्टी में है।
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी गलतियां मानी है। अब कह रहे हैं कि माफी के लिए हमें मजबूर किया गया और लोगों को आज गुमराह कर रहे हैं।
चीमा ने कहा कि आज जिस कानून में संशोधन कर रहे हैं, उसे राज्यपाल ने 2008 में पहले ही मंजूरी दी हुई है, इसलिए इसे राष्ट्रपति को भेजने की जरूरत नहीं है। विपक्ष की तरफ से जानबूझकर तरफ से गुमराह किया गया था। हमने विशेषज्ञों की राय ली गई है जिसके बाद ही कानून में संशोधन के लिए लेकर आए हैं। विपक्ष की डिले करने की मंशा है।
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