डिजिटल सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, पढ़े पूरी खबर…

 देशभर में डिजिटल का बढ़ता क्षेत्र जहां एक ओर काम को आसान और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। वहीं दूसरी ओर इससे साइबर अपराध बढ़ने का खतरा भी सातवें आसमान पर है। कारण है कि भारत में सरकारी सेवाएं, परीक्षाएं और जन-कल्याणकारी योजनाएं लगातार डिजिटल हो रही हैं।

ऐसे में अब केंद्र सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। केंद्र ने साफ कर दिया है कि साइबर सुरक्षा अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि दुनिया का कोई भी डिजिटल सिस्टम हमेशा के लिए 100% सुरक्षित नहीं हो सकता।

टेलीग्राम पर कार्रवाई का दिया हवाला

हाल ही में सरकारी डिजिटल सिस्टम्स को लेकर बढ़ी चिंताओं और NEET-UG की दोबारा परीक्षा के दौरान टेलीग्राम पर की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने यह बात कही। बता दें कि परीक्षा के दौरान धोखाधड़ी और पेपर लीक के फर्जी दावों को रोकने के लिए सरकार ने कुछ समय के लिए टेलीग्राम पर पाबंदियां लगाई थीं और उसके ‘मेसेज एडिट’ करने वाले फीचर को बंद कर दिया था।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब आपके पास इतना बड़ा डिजिटल ढांचा होता है, तो सारा डेटा एक जगह इकट्ठा हो जाता है। ऐसे में साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए सुरक्षा के इंतजाम सिस्टम बनाने के पहले दिन से ही होने चाहिए, न कि नुकसान होने के बाद।

व्हाट्सएप को भी चेतावनी

इसके अलावा सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर किसी भी मैसेजिंग एप के नए फीचर की वजह से धोखाधड़ी या फ्रॉड बढ़ता है, तो इसकी जिम्मेदारी खुद उस कंपनी की होगी।

इसका कारण है कि जब व्हाट्सएप के आने वाले नए यूजरनेम फीचर की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा गया, तो अधिकारी ने दो टूक कहा कि चिंता व्हाट्सएप को होनी चाहिए, हमें नहीं। सरकार ने चेतावनी दी है कि चाहे यूजरनेम हो, एडिट मेसेज हो या नकली ग्रुप बनाकर किसी की पहचान चुराना हो। अगर किसी भी फीचर का गलत इस्तेमाल हुआ, तो टेलीग्राम की तरह ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

व्हाट्सएप ने दी सफाई

इस मामले पर व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने कहा कि उनका नया ‘यूजरनेम’ फीचर लोगों की प्राइवेसी को बढ़ाने के लिए है, सुरक्षा कम करने के लिए नहीं। कंपनी ने दावा किया कि उन्होंने धोखाधड़ी रोकने के लिए कई सुरक्षा इंतजाम किए हैं, जैसे कोई बार-बार किसी का यूजरनेम गेस नहीं कर पाएगा और मशहूर हस्तियों, सरकारी विभागों या वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके।

हालांकि व्हाट्सएप प्रवक्ता के दलील के बाद भी सरकारी अधिकारियों ने अपना सख्त रुफ करते हुए कहा कि वे कंपनियों के दावों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले नतीजों के आधार पर फैसला करेंगे।

कमजोर पासवर्ड और लापरवाही सबसे बड़ा खतरा

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों ने बताया कि सरकार साइबर कमियों को दूर करने के लिए इंसानी और तकनीकी, दोनों ताकतों का इस्तेमाल कर रही है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों और कर्मचारियों द्वारा रखे जाने वाले कमजोर पासवर्ड, डिवाइस के इस्तेमाल में लापरवाही और ढीली सुरक्षा सबसे बड़ा जोखिम हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने अंत में कहा कि मैं कभी नहीं कहूंगा कि हम 100% साइबर सुरक्षित हैं। यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें हमें हर पल सतर्क रहना होगा।

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