ट्रंप का दावा फुस्स… दो दशक बाद अमेरिका को बड़ा झटका, कैसे ईरान ने गिराए US के फाइटर जेट?

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच ईरान द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा चर्चा में है। यह घटना इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले 20 साल में ऐसा बहुत कम देखने को मिला है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

अमेरिका और इजरायल के हमलों के करीब पांच हफ्ते बाद यह घटनाएं सामने आईं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है, लेकिन इन घटनाओं ने उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने एक F-15 E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को मार गिराया। इसमें एक सैनिक को बचा लिया गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। वहीं ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि एक A-10 वार्थोग विमान भी हमले में क्षतिग्रस्त होकर फारस की खाड़ी क्षेत्र में गिर गया।

कैसे निशाना बनाया गया?

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा जारी फुटेज से संकेत मिलता है कि इन हमलों में पारंपरिक रडार के बजाय ऑप्टिकल और इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

इस तकनीक में विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाया जाता है। यानी बिना रडार सिग्नल दिए ही लक्ष्य को ट्रैक किया जाता है, जिससे हमले का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

‘माजिद’ मिसाइल सिस्टम की भूमिका

इन हमलों में ईरान के स्वदेशी ‘माजिद’ मिसाइल सिस्टम के इस्तेमाल की संभावना जताई जा रही है। यह एक शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे 2021 में पेश किया गया था।

यह सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज मिसाइल को निशाना बना सकता है। इसकी मारक क्षमता करीब 700 मीटर से 8 किलोमीटर तक है और यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है।

कितना मुश्किल होता है फाइटर जेट को गिराना?

F-15 और A-10 जैसे आधुनिक फाइटर जेट को गिराना आसान नहीं होता। ये बहुत तेज होते हैं, तेजी से दिशा बदल सकते हैं और इनमें कई तरह के बचाव सिस्टम लगे होते हैं। इनमें गर्मी कम दिखाने वाली तकनीक, फ्लेयर जैसे बचाव उपाय और ऊंचाई पर उड़ान जैसी क्षमताएं होती हैं, जिससे इंफ्रारेड सिस्टम को भी धोखा मिल सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमले तभी सफल होते हैं जब विमान कम ऊंचाई पर हो या पायलट का ध्यान भटका हो। साथ ही जब बचाव के साधन सीमित हो जाएं, तब हमला कामयाब हो सकता है। इसलिए ऐसे हमले बहुत दुर्लभ और परिस्थितियों पर निर्भर होते हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

इन घटनाओं ने यह भी दिखाया है कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली अभी भी सक्रिय है और वह अमेरिकी-इजरायली हमलों का जवाब देने में सक्षम है। इससे पहले भी मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान ईरान ने कई ड्रोन और विमानों को मार गिराने का दावा किया है। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 13 हजार से ज्यादा मिशन उड़ाए जा चुके हैं और 12 हजार से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए गए हैं।

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