सनातन धर्म में पूजा-पाठ करने का अधिक महत्व है। लोग रोजाना सुबह और शाम प्रभु के सामने दीपक जलाकर विशेष साधना करते हैं और भजन-ध्यान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, साधना करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। ऐसा माना जाता है कि पूजा तभी सफल होती है। जब पूजा के दौरान वास्तु शास्त्र से जुड़े नियम का पालन किया हो।
वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि सही दिशा में दीपक की बत्ती होने से शुभ फल की प्राप्ति होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा के दौरान दीपक जलाते समय बत्ती की दिशा किस तरफ होनी चाहिए? अगर नहीं जानते, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं वास्तु के इस नियम के बारे में।
किस दिशा में होनी दीपक की बत्ती?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा के दौरान दीपक को जलाते समय बत्ती उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होनी चाहिए। इस दिशा को दीपक की बत्ती के लिए शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा में दीपक की बत्ती को जलाने से स्वास्थ्य लाभ और यश में वृद्धि होती है। साथ ही साधक को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस दिशा का रखें ध्यान
दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में दीपक की बत्ती नहीं होनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में दीपक की बत्ती होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और साधक को जीवन में धन की हानि का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं। इसलिए कहा जाता है कि पूजा-अर्चना करने से पहले वास्तु शास्त्र में बताए नियम के बारे में जरूर जान लें। दक्षिण दिशा में दीपक को पितृ पक्ष के दौरान ही रखा जाता है।
दीपक से जुड़े नियम
दीपक में लाल कलावे या लंबी रुई की बत्ती का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।
एक बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा में भूलकर भी टूटा या चटका दीपक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। है। इस तरह की गलती को करने से पूजा सफल नहीं होती है।
दीपक को रोजाना पूजा से पहले साफ जरूर करना चाहिए।
दीपक को जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इसे चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर पूजा थाली में रखना चाहिए।
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