शहर के कई इलाकों में खुले नाले नगर निगम की उदासीनता और लचर व्यवस्था की गवाही दे रहे हैं। बरसों से शिकायतों के बावजूद इन नालों को न तो ढंका गया और न ही इनके चारों ओर सुरक्षा इंतजाम किए गए। राहगीरों, स्कूली बच्चों और स्थानीय निवासियों की जान हर वक्त जोखिम में बनी हुई है।
जिम्मेदार विभाग केवल कागजी दावों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि खुले नालों के आसपास न तो चेतावनी बोर्ड हैं और न ही कोई अस्थायी बैरिकेडिंग। राजेंद्र नगर स्थित राम मनोहर लोहिया पार्क के पास कई वर्षों से खुला नाला लोगों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।
इसी क्षेत्र में डीएवी स्कूल भी स्थित है, जहां रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं आते-जाते हैं। बच्चे अक्सर नाले के पास से गुजरते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
वृंदावन गार्डन में ईएसआई अस्पताल रोड के पास रिहाइशी इलाके के समीप खुला नाला स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। रात के समय रोशनी की कमी के कारण हादसे की संभावना और भी बढ़ जाती है। वहीं पसौंडा कट के पास दिल्ली-वजीराबाद रोड किनारे नाले का बाउंड्री वाल टूटा हुआ है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों और पैदल चलने वालों दोनों को खतरा है।
इसके अलावा राजेंद्र नगर सेक्टर-3 में भी खुला नाला वर्षों से जस का तस पड़ा है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यदि समय रहते नालों को ढकने, बाउंड्री वाल बनाने और नियमित मरम्मत का काम किया जाए तो हादसों को रोका जा सकता है।
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