शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs Selling) की लगातार बिकवाली ने सरकार को परेशान कर दिया है, शायद इसलिए LTCG टैक्स समेत अन्य मोर्चों पर फॉरेन इन्वेस्टर्स को राहत देने की तैयारी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा है कि सरकार इस सप्ताह के अंत तक टैक्स में कटौती और कुछ बॉन्ड्स के ऑनरशिप पर लगी लिमिट को हटाने जैसे उपायों की घोषणा करने के लिए तैयार है, ताकि विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को कैबिनेट, ग्लोबल फंड्स द्वारा देश के बॉन्ड्स पर भुगतान किए जाने वाले करों में महत्वपूर्ण कटौती पर विचार कर सकता है। हालांकि, कैबिनेट की बैठक के बाद ऐसा कोई एलान नहीं किया गया है।
बॉन्ड पर कितनी टैक्स कटौती संभव?
सूत्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चूंकि विवरण गोपनीय हैं, इसलिए करों में कटौती की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार बॉन्ड्स से अर्जित ब्याज पर लगने वाले 20% कर को समाप्त करने या उसे न्यूनतम स्तर तक कम करने पर भी विचार करेगा।
इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक कुछ लंबी अवधि के सरकारी नोटों को पूरी तरह से सुलभ घोषित कर सकता है, जिससे विदेशी निवेशक बिना किसी सीमा के उन्हें खरीद सकेंगे। सरकारी प्रतिभूतियों की इस सूची में पिछला बदलाव 2024 में हुआ था, जब केंद्रीय बैंक ने 14 और 30 साल के बॉन्ड को सूची से हटा दिया था।
हालांकि, इस मामले पर वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक ने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है। ब्लूमबर्ग न्यूज़ ने पिछले महीने दावा किया था कि आरबीआई की सिफारिश के बाद भारत टैक्स कटौती पर विचार कर रहा है।
बता दें कि पिछले कुछ महीनों से विदेशी निवेशक, भारतीय बाजारों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में 29 मई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा 21,100 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड स्तर की शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई, जो कम से कम दो वर्षों में एक दिन में सबसे अधिक निकासी है।
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