पश्चिम एशिया की जंग अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुकी है और इसके रुकने के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध विराम के लिए पहल करने की अपील की है।
फिनलैंड के राष्ट्रपति अकेले नहीं हैं। इससे पहले अमेरिका की राजनीति में प्रभावी आवाज माने जाने वाले कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ऐसा नेता बताया है जो इस जंग को रुकवाने के लिए मध्यस्थता कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत एक तटस्थ देश है, जिसकी ताकत, कद और प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसा देश ही इस संघर्ष में मध्यस्थता कर सकता है। भारत में यूएई के राजदूत रहे राजनयिक हुसैन हसन मिर्जा भी कुछ ऐसी ही बात कह चुके हैं।
आइये जानते हैं दुनिया भारत को मध्यस्थता करने में सक्षम सबसे उपयुक्त देश के तौर पर क्यों देख रही है
अर्थव्यवस्था की बढ़ा रही रफ्तार
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था। वित्त वर्ष 2020-21 में इसकी ग्रोथ नकारात्मक हो गई थी। लेकिन इसके बाद भारत ने तेजी से वापसी की। दिसंबर 2025 तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। वित्त 2026 में लगभग 7.6 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। खास बात यह है कि जब अमेरिका चीन और ईयू की अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार सुस्त थी तब तब भारत तेजी से आगे बढ़ रहा था। ग्रोथ की यह रफ्तार रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितत के बावजूद जारी है।
भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत
17 प्रतिशत होगा ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ में भारत का योगदान
2026 में 26.6 प्रतिशत के साथ चीन रहेगा पहले स्थान पर
9.9 प्रतिशत योगदान के साथ अमेरिका रहेगा तीसरे स्थान पर
आईएमएफ के अनुसार आर्थिक ताकत के फायदे
मजबूत सेना
बेहतर तकनीक
ज्यादा व्यापार
दुनिया में ज्यादा प्रभाव
किसी खेमे से नहीं बंधा है भारत
भारत की खासियत है कि वह सभी देशों से अच्छे संबंध रखता है
इजरायल के साथ मजबूत रक्षा संबंध
ईरान के साथ पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध
अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी इसलिए भरोसेमंद मध्यस्थ बन सकता है भारत
भारत सभी पक्षों से बात कर सकता है
रणनीतिक स्वायत्तता भारत की विदेश नीति का सबसे मजबूत आधार है
किसी खेमे से जुड़ने के बजाए अपने हितों के आधार पर फैसले लेता है भारत
भारत के पास गुट निरपेक्ष आंदोलन की विरासत है
अन्य देशों की सीमाएं
चीन-ईरान के पक्ष में माना जाता है
यूरोप-अमेरिका के करीब है
खाड़ी देश-खुद युद्ध में फंसे हुए हैं
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