केरलम विधानसभा से CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित
केरलम विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने की मांग भी की गई है और चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव का सुझाव दिया गया है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने इसे केरलम के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।
मुख्यमंत्री सतीशन ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘केरलम ने इतिहास रचा है। पहली बार केरलम विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया है।’
किसने किया समर्थन?
विधानसभा में यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सतीशन ने पेश किया। इसे माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के विधायकों का समर्थन मिला, जबकि भाजपा के तीन विधायकों ने इसका विरोध किया। 140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के 102, एलडीएफ के 35 और भाजपा के तीन सदस्य हैं।
प्रस्ताव में क्या मांग की गई?
प्रस्ताव में एसआईआर व पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि किसी भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित न किया जाए। एसआईआर प्रक्रिया की अनियमितताओं को दूर किया जाए और सीईसी को हटाने की कार्यवाही शुरू हो।
इसके अलावा सीईसी की चयन समिति में सुधार किया जाए और उसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता व प्रधान न्यायाधीश शामिल हों। सतीशन ने कहा, ‘मतदान का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’
भाजपा ने उठाए सवाल
प्रस्ताव पेश किए जाने पर भाजपा विधायक दल के नेता बीबी गोपकुमार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि उनका निर्वाचन वैध है या नहीं। उन्होंने प्रस्ताव में संशोधन का सुझाव दिया कि 2026 की राज्य विधानसभा भंग की जाए। प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद विरोध कर रहे भाजपा समर्थकों ने विधानसभा परिसर के बाहर उसकी प्रति जलाई।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रस्ताव को ‘फर्जीवाड़ा’ बताते हुए कहा कि इसे ऐसे समय पारित किया गया है, जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पारित होने से पता चलता है कि कांग्रेस और माकपा मिलकर काम कर रहे हैं, जबकि दोनों एक-दूसरे पर भाजपा के साथ समझौता करने का आरोप लगाते हैं।
चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि केरलम के पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी को पद से क्यों नहीं हटाया गया, जो अब मुख्यमंत्री के निजी सचिव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान, जब वह अधिकारी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से कांग्रेस को फायदा हुआ।
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