कितना और गिरेगा सोना-चांदी, खरीदें या नहीं, किसमें करें निवेश? 

ग्लोबल मार्केट में मचे हाहाकार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मजबूत होते डॉलर के चलते सोने और चांदी (gold silver price crash today) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज हुई।

अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं और नुकसान से घबराए हुए हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। 29 जनवरी के बाद यानी पिछले 53 दिनों में सोना 25% और चांदी करीब 50% तक टूट चुकी है।

ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सोने-चांदी के दाम कितने और गिरेंगे? क्या यह खरीदने का सही समय आ गया है? सोने-चांदी की अगला टारगेट प्राइस क्या होगा? कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए जागरण बिजनेस ने केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया से खास बातचीत की और 15 सवालों में आपके मन में उठ रहे सभी कंफ्यूजन को दूर किया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंशः

सवाल 1: सोने-चांदी की कीमतों में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई है?
जवाबः बाजार में इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल टेंशन और अमेरिका का आक्रामक रुख है। डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और 48 घंटे के अल्टीमेटम ने ग्लोबल इक्विटी और कमोडिटी मार्केट में पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिकवाली) ला दी है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ने भी साफ कर दिया है कि वह फिलहाल ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करने जा रहा है। इन दोनों फैक्टर्स ने सोने-चांदी पर भारी दबाव बना दिया है।

सवाल 2: इस गिरावट में कौन-कौन से देश मुख्य भूमिका निभा रहे हैं?
जवाबः इस गिरावट में मुख्य तौर पर अमेरिका, ईरान और मिडिल ईस्ट के देश शामिल हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी और बयानबाजी से अस्थिरता आई है। इसके अलावा, ऐसी भी चर्चाएं हैं कि पोलैंड जैसे कुछ देश अपना 70-80 टन सोना बेचने की तैयारी में हैं। हालांकि इसकी पक्की पुष्टि नहीं है, लेकिन ऐसे सेंटीमेंट बाजार को डराने के लिए काफी हैं।

सवाल 3: क्या सच में सेंट्रल बैंक अपना सोना बेच रहे हैं? अगर हां, तो इसका क्या असर पड़ेगा?
जवाबः जब दुनिया भर में हालात खराब होते हैं और देशों को अपने नुकसान की भरपाई करनी होती है, तो वे अपना गोल्ड रिजर्व बेच सकते हैं। जनवरी में हमने ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स से 10 बिलियन डॉलर का फंड निकलते देखा था। अगर सेंट्रल बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोना बेचना शुरू किया, तो यह गिरावट और भी गहरी हो सकती है।

सवाल 4: मिडिल ईस्ट का युद्ध और दुबई के हालात सोने को कैसे प्रभावित कर रहे हैं?
जवाबः दुबई को हमेशा से निवेश के लिए सबसे सुरक्षित (Safe Haven) माना जाता रहा है। लेकिन हालिया हमलों के बाद दुबई का प्रॉपर्टी मार्केट 30% तक गिर गया है और वहां के क्रिप्टो व इक्विटी मार्केट में भी भारी बिकवाली है। जब सुरक्षित माने जाने वाले देशों में डर का माहौल बनता है, तो बड़े निवेशक अपना पैसा कमोडिटीज से निकालकर कैश में रखने लगते हैं।

सवाल 5: कीमतों में अभी और कितनी गिरावट आ सकती है, क्या हैं टारगेट्स?
जवाबः गिरावट का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने के लिए 4000 डॉलर (बारतीय करेंसी में 1,32,534 रुपए प्रति 10 ग्राम) का एक साइकोलॉजिकल सपोर्ट है। अगर यह टूटता है, तो भाव 3500-3550 (भारतीय करेंसी में करीब 1,15,880 रुपए प्रति 10 ग्राम) तक जा सकते हैं। चांदी की बात करें तो इसने काफी अहम लेवल तोड़ दिए हैं। अगर पैनिक बना रहा, तो घरेलू बाजार में चांदी और भी नीचे खिसक सकती है। कुल मिलाकर, तुरंत किसी बड़े उछाल की उम्मीद कम है।

सवाल 6: क्या अप्रैल के वेडिंग सीजन में डिमांड बढ़ने से दाम वापस चढ़ेंगे?
जवाबः कई लोगों को लगता है कि शादियों का सीजन सोने को सपोर्ट देगा, लेकिन ऐसा मुश्किल लग रहा है। इस वक्त आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता गैस सिलेंडर और महंगाई है। युद्ध के कारण लॉजिस्टिक कॉस्ट और महंगाई बढ़ रही है। सोना लोग तब खरीदते हैं जब हाथ में पैसा और शांति हो। महंगाई के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता कम हुई है, इसलिए सिर्फ शादियों के भरोसे बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद करना गलत होगा।

सवाल 7: क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) और मजबूत डॉलर सोने-चांदी को कैसे गिरा रहे हैं?
जवाबः यह समझना बहुत जरूरी है। बिना कच्चे तेल के कोई इकोनॉमी नहीं चलती। जो कच्चा तेल पहले 60-65 डॉलर में मिलता था, वह अब 100-120 डॉलर के पार जा रहा है। कच्चा तेल महंगा होने से डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है। डॉलर इंडेक्स, जो 95 पर था, वह 100 के पार जा चुका है। नियम यह है कि जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने-चांदी जैसी कमोडिटी में बिकवाली आती है और उनके दाम गिरते हैं।

सवाल 8: जिन लोगों ने ऊंचे भाव पर कर्ज लेकर सोना-चांदी खरीदा था, उन्हें अब क्या करना चाहिए?
जवाबः नुकसान देखकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन अगर आपने लंबी अवधि (लॉन्ग टर्म) का सोचकर निवेश किया था, तो अब घबराहट में न बेचें। सोने-चांदी में हमेशा एकतरफा तेजी या मंदी नहीं रहती। अगर भाव यहां से थोड़ा और गिरते हैं, तो आप निचले स्तर पर और खरीदारी करके अपना भाव ‘एवरेज’ कर सकते हैं। नुकसान में माल काटकर निकलना समझदारी नहीं होगी।

सवाल 9: शेयर बाजार भी क्रैश कर रहा है, तो क्या अभी सोने-चांदी में निवेश कर लेना चाहिए?
जवाबः इस वक्त जल्दबाजी बिल्कुल न करें। बाजार बहुत ज्यादा अस्थिर (Volatile) है। डोनाल्ड ट्रंप का बयान आता है तो कच्चा तेल 10% गिर जाता है, और ईरान का पलटवार आता है तो बाजार फिर रिकवर कर जाता है। अभी कोई भी नई खरीदारी करने से पहले 4-5 दिन का इंतजार करें। हालात को थोड़ा स्थिर होने दें।

सवाल 10: सोने और चांदी में से बेहतर रिटर्न कौन देगा, निवेशकों को किसमें पैसा लगाना चाहिए?
जवाबः इस वक्त सोना (Gold) बेहतर विकल्प है। इसे ‘गोल्ड-सिल्वर रेशियो’ से समझा जाता है। जब यह रेशियो बढ़ता है (जैसे अभी यह 66 से 75-80 की तरफ जा रहा है), तो इसका मतलब है कि सोना, चांदी के मुकाबले ज्यादा मजबूत रहेगा। ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के कारण फैक्ट्रियों में काम धीमा है, जिससे चांदी (जिसका इंडस्ट्रियल इस्तेमाल ज्यादा होता है) की डिमांड घटी है। इसलिए शॉर्ट टर्म में सोने में निवेश ज्यादा सुरक्षित है।

सवाल 11: निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए और अगला टारगेट प्राइस क्या होगा?
जवाबः मौजूदा स्तर (Current Levels) पर एकमुश्त बड़ी खरीदारी (Lump sum buying) करने से बचें। बाजार को एक बेस बनाने दें। अगर आपके घर में शादी है और आपको इस्तेमाल के लिए सोना चाहिए, तो आप खरीदारी कर सकते हैं। लेकिन अगर आप सिर्फ निवेश (Investment) के नजरिए से देख रहे हैं, तो निचले स्तरों का इंतजार करें। अगर टारगेट प्राइस की बात करें सोना 1.12-1.15 लाख रुपए (gold target price 2026) तक गिर सकता है। जबकि चांदी ₹1.75-1.80 लाख (silver target price 2026) तक पहुंच सकती है।

सवाल 12: फिजिकल सोने-चांदी के अलावा निवेश के क्या-क्या ऑप्शन हो सकते हैं?
जवाबः अगर आप सिर्फ निवेश करना चाहते हैं, तो गहने या बिस्किट लेने के बजाय ये विकल्प चुनें:

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): आप इन्हें सेकेंडरी मार्केट से खरीद सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड: हमेशा RBI या SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म से ही लें।
कमोडिटी एक्सचेंज: आप एक्सचेंज के जरिए 1 ग्राम से लेकर 10 ग्राम तक की डिलीवरी ले सकते हैं, हालांकि यह थोड़ा टेक्निकल होता है।
गोल्ड/सिल्वर ETF: यह सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है।

सवाल 13: ईटीएफ (ETF) और एसआईपी (SIP) में से निवेश के लिए क्या बेहतर है?
जवाबः सबसे बेहतरीन रणनीति है ETF में SIP करना। ईटीएफ (Exchange Traded Fund) म्यूचुअल फंड की तरह काम करते हैं और SEBI द्वारा रेगुलेटेड होते हैं। जब आप ईटीएफ में हर महीने एसआईपी (Systematic Investment Plan) करते हैं, तो आपको बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं करनी पड़ती।

सवाल 14: गिरते बाजार में एसआईपी (SIP) करने का क्या फायदा है?
जवाबः गिरते बाजार में एसआईपी आपकी सबसे अच्छी दोस्त होती है। जब बाजार गिरता है, तो उसी पैसे में आपको ज्यादा ‘यूनिट्स’ अलॉट होती हैं। इसे ‘सिल्वर इन्वेस्टमेंट प्लान’ की तरह सोचें। कोई भी इंसान बाजार का एकदम निचला स्तर (Bottom) नहीं पकड़ सकता। एसआईपी आपके इमोशन्स को कंट्रोल में रखती है और सस्ते भाव पर आपकी पोजीशन मजबूत करती है।

सवाल 15: आने वाले 2 से 3 सालों के लिए सोने-चांदी का भविष्य (Future Outlook) कैसा है?
जवाबः छोटी अवधि (Short term) में भले ही दबाव और करेक्शन दिख रहा हो, लेकिन लंबी अवधि (Long term) की कहानी पूरी तरह से बुलिश (तेजी वाली) है। एक बार युद्ध के बादल छंट जाएं और टाइम करेक्शन पूरा हो जाए, तो सोने-चांदी में दोबारा शानदार तेजी लौटेगी। क्लीन एनर्जी और नई तकनीकों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ना ही है। अगले 2-3 सालों में आप आराम से 15% का स्टैंडर्ड रिटर्न हासिल कर सकते हैं। बस अपना नजरिया लंबा रखें।

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