पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले पंथक पॉलिटिक्स करवट ले रही है। सियासत में नए विकल्प के संकेत दिख रहे हैं, जिसका खुलासा जल्द होगा। 10 महीने पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) टूट गया और शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) का उदय हुआ।
अब पुनर सुरजीत में भी बगावती तेवर दिख रहे हैं। चरणजीत सिंह बराड़, सुरजीत सिंह रखड़ा के बाद अब दाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने शिअद (पुनर सुरजीत) का दामन छोड़ दिया है।
बराड़ अपना खेमा लेकर भाजपाई बन चुके हैं तो पिछले दिनों रखड़ा ने सीएम भगवंत सिंह मान की मौजूदगी में आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली है। अब विधायक अयाली ने पुनर सुरजीत तो छोड़ दी है मगर उन्होंने अपनी नई भूमिका का अभी एलान नहीं किया है। हालांकि उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वे भाजपा, कांग्रेस, आप और शिअद (बादल) के साथ जाने वाले नहीं हैं।
अयाली दरअसल, पिछले सात-आठ महीनों से शिअद (पुनर सुरजीत) और जेल में बंद गरमख्याली नेता अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे के बीच गठजोड़ करवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बहुत प्रयास कर तालमेल कमेटी का भी गठन भी करवाया।
दो से तीन बैठकें भी हुईं मगर बात सिरे नहीं चढ़ पाई। अयाली का मकसद था कि सूबे में एक मजबूत पंथक सियासी धड़ा खड़ा करना। खैर, पुनर सुरजीत से अलग होने के बाद विधायक अयाली ने सभी दलों को नकारा मगर वारिस पंजाब दे दल की जमकर तारीफ की।
अमृतपाल के साथ नई पारी शुरू कर सकते हैं अयाली
राजनीतिक माहिरों और सूत्रों की माने तो अयाली अमृतपाल सिंह के दल के साथ मिलकर एक नई सियासी पारी शुरू कर सकते हैं। अयाली ने कहा कि आने वाले समय में वे संगत, सिख बुद्धिजीवियों और पंथक भावना के मद्देनजर ही अपना अगला फैसला लेंगे और पंथ व पंजाब की निष्काम व निस्वार्थ सेवा करते हुए पंजाब की चढ़दी कला के लिए काम करेंगे।
सीएम मान कई बार दे चुके थे ऑफर
आम आदमी पार्टी की निगाहें भी अयाली पर गढ़ी थीं क्योंकि विधायक अयाली पंजाब में बड़े पंथक चेहरों में से एक माने जाते हैं। खुद सीएम भगवंत सिंह मान उन्हें आप में शामिल होने के लिए कई बार विधानसभा के भीतर व बाहर इशारों में ऑफर दे चुके थे मगर अयाली नहीं माने। उधर अन्य पंथक नेता रखड़ा को सीएम ने आप ज्वाइन कर दी जबकि बराड़ भाजपा में चले गए।
पंथक सीटों पर नजर
अयाली की नजर प्रदेश की उन विधानसभा सीटों पर हैं जहां पंथ का खासा असर रहता है। पंजाब में 117 में से करीब 35 सीटें ऐसी मानी जाती हैं। इनमें से 19 सीटें ऐसी हैं, जिन पर पंथक प्रभाव ज्यादा हैं। 18 सीटें खड़ूर साहिब और फरीदकोट लोकसभा क्षेत्र में आती हैं।
दोनों सीटों पर गरमख्याली नेता अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा सांसद हैं। इन क्षेत्रों में वारिस पंजाब दे दल की भी ठीकठाक पकड़ है। दाखा सीट से अयाली खुद विधायक हैं। इन्हीं सीटों पर फोकस कर और वारिस पंजाब दे के साथ मिलकर अयाली अपनी सियासत को आगे बढ़ा सकते हैं।
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