देश की सबसे पुरानी निजी टेलीकॉम कंपनी एयरटेल अब विदेशी कंपनी बन सकती है. केंद्र सरकार ने भारती एयरटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 49 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने को मंजूरी दे दी है. कंपनी ने मंगलवार को शेयर बाजार को यह जानकारी दी है.
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने पहले ही कंपनी में विदेशी पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) या विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को चुकता पूंजी के 74 फीसदी तक निवेश करने की इजाजत दी थी. भारती एयरटेल का कारोबार फिलहाल दुनिया के 18 देशों में फैला हुआ है. 24 साल पहले 7 जुलाई 1995 को सुनील भारती मित्तल ने एयरटेल की सबसे पहले शुरुआत दिल्ली में की थी.
इस मंजूरी के बाद परेशान चल रही एयरटेल को अपने बकाया देने, नेटवर्क विस्तार और स्पेक्ट्रम नीलामी भुगतान के लिए विदेशी निवेशकों से रकम मिल सकेगी. गौरतलब है कि जियो के आने के बाद तगड़ी प्रतिस्पर्धा और एजीआर पर हजारों करोड़ करोड़ की रकम सरकार को देने की बाध्यता की वजह से टेलीकॉम कंपनियों की हालत खराब है. ऐसे में उन्हें अपना अस्तित्व बचाने के लिए विदेशी निवेश जैसे उपाय का सहारा लेने की मजबूरी हो गई है.
भारती एयरटेल ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में कहा है, ‘भारती एयरटेल लिमिटेड को 20 जनवरी 2020 को टेलीकॉम डिपार्टमेंट से विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर कंपनी की चुकता पूंजी के 100 प्रतिशत तक करने की मंजूरी मल गई है.’
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कंपनी ने वैधानिक बकाए के रूप में करीब 35,586 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. इसमें 21,682 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क और 13,904.01 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम बकाया था. इसमें टेलीनॉर और टाटा टेली के बकाये शामल नहीं रहे.
100 फीसदी एफडीआई मंजूरी के बाद देश की सबसे पुरानी निजी संचार कंपनी विदेशी इकाई बन सकती है. भारती टेलीकॉम, भारती एयरटेल की प्रमोटर कंपनी है. भारती एयरटेल में करीब 41 फीसदी हिस्सेदारी भारती टेलीकॉम की है और इसमें अभी विदेशी निवेश 21.46 फीसदी है. कंपनी में आम शेयरधारकों का हिस्सा 37 फीसदी है. भारती टेलीकॉम ने सिंगापुर के सिंगटेल और अन्य विदेशी कंपनियों से 4,900 करोड़ रुपये के निवेश के लिए पिछले महीने सरकार से अनुमत मांगी थी.
तो भारती टेलकॉम के विदेशी इकाई बन जाने के साथ ही भारती एयरटेल में विदेशी हिस्सेदारी बढ़कर 84 प्रतिशत हो जाएगी. फिलहाल सुनील भारती मित्तल और उनके परवार की भारती टेलीकॉम में करीब 52 फीसदी हिस्सेदारी है.